समाज की कुरीतियों को दूर करने की यह एक बड़ी पहल : सांसद

पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कुल 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया. कार्यक्रम में दुमका जिले के तीन प्रखंडों से चयनित वर-वधू शामिल हुए.

दुमका. दुमका के बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम में बुधवार को सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कुल 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया. कार्यक्रम में दुमका जिले के तीन प्रखंडों से चयनित वर-वधू शामिल हुए. स्टेडियम को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, वहीं बैठने की समुचित व्यवस्था की गयी थी, जिससे नवविवाहित जोड़ों और उनके परिजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि दुमका सांसद नलिन सोरेन, विशिष्ट अतिथि दुमका विधायक एवं पूर्व मंत्री बसंत सोरेन, जामा विधायक डॉ लोईस मरांडी, जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा, जिला परिषद उपाध्यक्ष सुधीर मंडल, आर्क बिशप जयराज मार्क ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इसके बाद विवाह की सभी रस्में पूरी की गयीं. विवाह संपन्न होने के बाद सभी अतिथियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया और उनके सुखमय दांपत्य जीवन की कामना की. सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि समाज की कुरीतियों को दूर करने की यह एक बड़ी पहल है. कहा कि आदिवासी समाज में कई कुरीतियां हैं. विवाह नियम से नहीं किए जाने के बाद भी एक साथ तो रहते हैं पर समाज में कई कुरीतियां के वजह से ऐसे जोड़ों को कई बार काफी समस्या से गुजरना होता है. ऐसे जोड़े वैवाहिक जीवन में कहीं भी शान से नहीं जा सकते थे. सामूहिक विवाह का यह कार्यक्रम इन्हीं कुरीतियों को दूर करने की ठोस पहल है. विधिवत शादी कर जोड़े अपने जीवन में खुश रह सकेंगे. उनके रिश्ते को मान्यता भी मिलेगी और समाज कल्याण विभाग की ओर से सहायता भी. पूर्व मंत्री और दुमका विधायक बसंत सोरेन ने कहा कि जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा के नेतृत्व में दुमका में सामूहिक विवाह कार्यक्रम किया जाना एक साहसिक कदम है. कहा कि समाज में विधिवत शादी नहीं कर किसी बहन का अविवाहित होकर परिवार में रहना एक अभिशाप होता है. हमेशा परिवार में उनका तिरस्कार होता है. कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कई बार कुछ बड़ी घटनाएं हो जाने के भी मामले सामने आते रहते हैं. ऐसे में समाज के ऐसे जोड़ों का कार्यक्रम के माध्यम से सामूहिक विवाह कराया जाना एक अच्छी पहल है. यह पहल काफी सराहनीय है. यह इस क्षेत्र के लिए नया अध्याय है. ऐसी सोच से बाहर निकल रही बहन-बेटियों को सरकार की योजनाओं का भी लाभ मिल पायेगा. जामा की विधायक डॉ लोईस मरांडी ने आयोजन से जुड़े अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मेहनत की प्रशंसा करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को समझकर इस तरह के आयोजन बेहद जरूरी हैं. उन्होंने महिलाओं से संबंधित दस्तावेजी समस्याओं का जिक्र करते हुए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को पता है कि गांव में किस तरह की समस्याओं से लोग जूझते हैं. उन्होंने महिलाओं से संबंधित एक समस्या का जिक्र किया कि शादी होने के बाद भी महिलाओं का सर्टिफिकेट पिता के नाम से बनता है, जो सरकार का नियम है. उन्होंने सावित्री बाई फुले योजना का जिक्र करते हुए कहा कि किशोरी इनका भरपूर लाभ उठाएं और दूसरे को भी इसके प्रेरित करें. जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा ने कहा कि सामूहिक विवाह समारोह गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक मजबूत सहारा है. इससे समाज में समानता, एकता और समरसता का भाव बढ़ता है. समारोह के अंत में नवविवाहित जोड़ों को उपहार सामग्री भी प्रदान की गयी. कार्यक्रम को जिला परिषद के उपाध्यक्ष सुधीर मंडल, उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान, आर्क बिशप जयराज मार्क आदि ने भी संबोधित किया. मंच संचालन अशोक कुमार सिंह ने किया.

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Published by: Binay kumar

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