सप्तमी को नैहर आती हैं माता

पर्व. माता रानी की आराधना में जुटे जिले वासी, भक्ति की बह रही बयार बासुकिनाथ : मां दुर्गा सप्तमी को अपने बच्चों के साथ छह दिनों की यात्रा पूरी कर कैलाश से धरती पर उतरती हैं. एक केले के तने में कपड़े लपेट कर उसे कलाबई की शक्ल दी जाती है. षष्ठी को बेलभरण माता […]

पर्व. माता रानी की आराधना में जुटे जिले वासी, भक्ति की बह रही बयार

बासुकिनाथ : मां दुर्गा सप्तमी को अपने बच्चों के साथ छह दिनों की यात्रा पूरी कर कैलाश से धरती पर उतरती हैं. एक केले के तने में कपड़े लपेट कर उसे कलाबई की शक्ल दी जाती है. षष्ठी को बेलभरण माता को निमंत्रण देकर सप्तमी को मां को नैहर लाया जाता है. फिर माता नवमी तक अपने मायके में रहती है और फिर विजयादशमी के दिन मूर्ति विसर्जन के साथ लौट जाती है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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