आदिवासियों ने गाड़ा चुड़का

गतिरोध. विवादित जमीन पर अवैध निर्माण के बाद एसडीओ ने लगायी थी रोक बासुकिनाथ मंदिर से पूर्वी किनारे स्थित तारा मंदिर की है भूमि बासुकिनाथ : बासुकिनाथ मंदिर से पूर्वी किनारे स्थित तारा मंदिर की भूमि पर चल रहे अवैध निर्माण कार्य को अनुमंडलाधिकारी जिशान कमर ने छह मई को बंद कराया था. उसी भूमि […]

गतिरोध. विवादित जमीन पर अवैध निर्माण के बाद एसडीओ ने लगायी थी रोक

बासुकिनाथ मंदिर से पूर्वी किनारे स्थित तारा मंदिर की है भूमि
बासुकिनाथ : बासुकिनाथ मंदिर से पूर्वी किनारे स्थित तारा मंदिर की भूमि पर चल रहे अवैध निर्माण कार्य को अनुमंडलाधिकारी जिशान कमर ने छह मई को बंद कराया था. उसी भूमि पर सोमवार को दर्जनों की संख्या में बदिया गांव के आदिवासी पंरपरागत हथियार से लैश होकर जमीन पर पहुंचे. राजकुमार मिर्धा को जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए आदिवासियों ने चुड़का गाड़ दिया. श्यामलाल मरांडी, दुर्गा मरांडी, राजेश हेंब्रम, सुशील मरांडी,
सीताराम मरांडी आदि ने बताया कि यह जमीन वदिया के राजकुमार मिर्धा का है. हालांकि इस विवादित भूमि पर एसडीओ ने अगले आदेश तक किसी भी पक्षकार को जमीन पर कार्य करने से रोका है, आदेश की अवहेलना की स्थिति में सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी. ज्ञात हो कि ग्रामीणों की शिकायत पर छह मई को एसडीओ जिशान कमर ने सख्त निर्देश देते हुए कहा था कि बासुकिनाथ में सरकारी जमीन को हर हाल में अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया जायेगा. लेकिन इस दिशा में अबतक कोई कारवाई नहीं हुई है.
पंरपरागत शस्त्रों से लैस थे आदिवासी
विरोध जताते आदिवासी.
3 बीघा 11 कटठा 4 धूर जमीन कब्जा करने का प्रयास
प्राचीन तारा मंदिर के जमाबंदी नंबर 58 के अन्तर्गत दाग संख्या 568 कुल रकवा तीन बीघा ग्यारह कटठा चार धूर जमीन पर भू माफिया अवैध कब्जा कर रहा है. ग्रामीणों ने हस्ताक्षरित आवेदन अनुमंडलाधिकारी को आवेदन देकर जमीन को भू माफिया के चंगुल से भूमि को मुक्त कराने की मांग की है.
ग्रामीणों ने बताया कि भू माफिया द्वारा अवैध तरीके से भूमि को कब्जा किया जा रहा है. इस भूमि पर से फसल उपजा कर मंदिर के स्वामी श्यामानंद सरस्वती मंदिर का संचालन करते रहे हैं. गेंजर सेटलमेंट में यह जमीन लोचन मिर्धा के नाम से दर्ज है तथा यह जमाबंदी रैयत है. ग्रामीणों का कहना है कि इस जमीन का कोई वारिशान नहीं है तथा पूर्व में जमीन का मालिक द्वारा इसे दान में तारा मंदिर को दिया गया. लेकिन अब चुड़का गाड़ आदिवासी ही इस जमीन पर मालिकाना हक जता रहे हैं.

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