दुमका, रांची समेत चार जिलों में बनेगा सीड हब

गुड न्यूज. दलहन की खेती को मिलेगा बढ़ावा, दाल की कमी पूरी करने की कवायद देशभर में दाल की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार दलह प्रत्यक्षण योजना चला रही है. इसके तहत झारखंड में कुल चार सीड हब बनाने की तैयारी है. दुमका : देशभर में दलहन की कमी एवं आसमान […]

गुड न्यूज. दलहन की खेती को मिलेगा बढ़ावा, दाल की कमी पूरी करने की कवायद

देशभर में दाल की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार दलह प्रत्यक्षण योजना चला रही है. इसके तहत झारखंड में कुल चार सीड हब बनाने की तैयारी है.
दुमका : देशभर में दलहन की कमी एवं आसमान छूती कीमतों के बावत केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (दलहन) के अंतर्गत दलहन की खेती को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए दलहन प्रत्यक्षण योजना भी चलाया जा रहा है.इस योजना के तहत पूरे देश में 93 सीड हब के माध्यम से विभिन्न दलहनी फसलों के 21475 टन बीज उत्पादित किया जाना है. झारखंड में कुल चार सीड हब बनाने की तैयारी है, जिसके माध्यम से अरहर के 285 टन, मूंग के 225 टन, उरद के 200 टन, मटर के 55 टन एवं चना के 175 टन बीज तैयार की जायेगी. ये सभी बीज किसानों की सहभागिता द्वारा तथा संस्थानों के प्रक्षेत्रों में भी उत्पादित किया जायेगा.
झारखंड में कुल 9750 टन बीजों का उत्पादन रांची, दुमका, हजारीबाग एवं बोकारो में सीड हब के माध्यम से किया जाना है. बीज उत्पादन को बढावा देने के लिए संस्थानों को भी दायित्व दिये गये हैं. रांची में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा 2650 क्वींटल, दुमका में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 2550 क्वींटल, हजारीबाग में एआईसीआरपी द्वारा 2350 क्वींटल एवं बोकारो में केवीके द्वारा 2200 क्वींटल दलहन बीज का उत्पादन 2016-17, 2017-18 एवं 2018-19 तक किया जाना है.
सभी बीज किसानों की सहभागिता द्वारा संस्थानों के प्रक्षेत्रों में उत्पादित किया जायेगा
क्या कहते हैं कृषि विभाग के अधिकारी
वर्तमान वर्ष में दुमका में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा अरहर के 200 क्वींटल तथा मूंग, उरद व चना के 150-150 क्वींटल बीज उत्पादन किया जायेगा. किसानों की जमीन पर तैयार बीज की पुनर्खरीद कर उसका प्रसंस्करण, बैगिंग, टैगिंग एवं प्रमाणीकरण केवीके ही करेगी. फिर इन बीजों का वितरण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत किसानों के बीच किया जायेगा. सभी बीज किसानों की सहभागिता द्वारा तथा संस्थागत के प्रक्षेत्रों में भी उत्पादित किया जायेगा.
प्रोत्साहन के लिए आत्मा द्वारा 2500 रुपये प्रति क्वींटल की दर से प्रोत्साहन राशि भी दी जायेगी, ऐसा प्रावधान इस बार किया गया है.
डॉ श्रीकांत सिंह, प्रधान कृषि वैज्ञानिक, केवीके दुमका.

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