दुमका कोर्ट : जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रिजवान अहमद के न्यायालय ने एससीएसटी केस 01/09 में सुनवाई क रने के बाद शिकारीपाड़ा के उमेश सिंह को दोषी पाते हुए भादवि की धारा 376,511 में पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं तीन हजार रुपये जुर्माना और एससीएसटी की धारा के तहत दोषी पाते हुए तीन वर्ष का सश्रम करावास एवं दो हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी है. सभी सजा एक साथ चलेगी.
जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा काटनी होगी. शिकारीपाड़ा थाना में 01 नवंबर 2008 को एक 11 वर्षीय लड़की ने भादवि की धारा 376,511 एवं एससीएसटी की धारा के तहत उमेश सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी के अनुसार पीड़िता घटना के दिन घर में अकेली थी .उसी समय आरोपित घर में घुसा और दुष्कर्म करने का प्रयास करने लगा.पीड़िता घर से निकल कर बाहर भागी और अपनी मां को बतायी थी.
जिसके बाद मां के साथ थाना जाकर उस बच्ची ने प्राथमिकी दर्ज करायी थी. न्यायालय में सात गवाहों और डीएसपी चंदन कुमार सिन्हा का परीक्षण हुआ.अभियोजन पक्ष की ओर से स्पेशल एपीपी मनोज कुमार साह-2 ने केस की पैरवी की.
