साहित्यकार सतीश चंद्र झा की मनी 17वीं पुण्यतिथि

स्थानीय कवि-साहित्यकारों ने सतीश बाबू के बहुआयामी व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

सतीश बाबू के संस्कार की बदौलत साहित्यिक वातावरण शिखर पर : अरुण सिन्हा संवाददाता, दुमका साहित्यकार स्वर्गीय सतीश चंद्र झा की 17वीं पुण्यतिथि ग्रांट इस्टेट के सतीश चौरा में मनायी गयी. स्थानीय कवि-साहित्यकारों ने सतीश बाबू के बहुआयामी व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. वरीय साहित्यकार डॉ रामवरण चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में वरीय साहित्यकार डॉक्टर चतर्भुज नारायण मिश्र ने सतीश बाबू को याद करते हुए उन्हें अग्रज तुल्य बताते हुए कहा उन्हें याद करना मेरे लिए अत्यंत ही भावुक क्षण है, उनके साथ बिताये एक-एक पल मेरे लिए अनमोल रहा है. अशोक सिंह ने 90 के दशक के भाषा संगम से लेकर सतीश बाबू की स्मृति में गठित सतीश स्मृति मंच तक की यात्रा को विस्तार से बताते हुए कहा कि भाषा संगम को ऊंचाई तक पहुंचाने में सतीश बाबू ने जो योगदान दिया था, उसी साहित्यिक संस्कार को संजोते हुए उनके परिवार के सदस्यों द्वारा जो साहित्य सेवा की जा रही है. अतुलनीय है. अरुण सिन्हा ने कहा कि संस्कार का जो प्रवाह होता है. वह अद्वितीय साबित होता है. सतीश बाबू के संस्कार का ही प्रतिफल है कि आज शहर का साहित्यिक वातावरण सतीश स्मृति मंच के द्वारा शिखर की ओर अग्रसर है. विद्यापति झा ने सतीश बाबू के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा करते हुए सतीश स्मृति मंच की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए दुमका के साहित्यिक विरासत को याद किया. डॉ अमरेंद्र सुमन की अध्यक्षता में द्वितीय सत्र के कवि सम्मेलन में स्थानीय कवियों ने अपनी अपनी कविता से सभा को महमहा दिया. वरीय साहित्यकार कमला कांत प्रसाद सिन्हा ने राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत कविता से कविता सत्र का आगाज करते हुए सत्र को जीवंत बना दिया. अंजनी शरण ने अपनी कविता ””मुट्ठी भर जिजीविषा”” के द्वारा आदमी के शौर्य, धैर्य की जहां विस्तृत व्याख्या की. वहीं पवन मिश्रा की पिता को समर्पित कविता ने श्रोता को भावुक कर दिया. राजीव नयन तिवारी द्वारा अंगिका में प्रस्तुत पहलगाम घटना पर केंद्रित कविता ने जहां ओजस्विता को परिभाषित किया. वहीं रोहित अंबष्ठ ने प्रेम पर केंद्रित ”” सच बतलाऊं मुझको कैसा लगता है, चांद तुम्हारे चेहरे जैसा लगता है”” द्वारा प्रेम को परिभाषित किया. नवीन ठाकुर की रचना ””पावन यह बेला आज, सहित दुर्गेश चौधरी, धर्मेंद्र नारायण पाण्डेय, विष्णुदेव महतो अलबेला ने भी दर्शकों को अपनी कविता के माध्यम से मंत्रमुग्ध किया. मंच के सचिव कुंदन कुमार झा ने सतीश स्मृति मंच के विभिन्न साहित्यिक क्रियाकलापों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम के अंत में मंच के सक्रिय सदस्य पवन कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम में स्थानीय साहित्यकारों के अलावा राजेंद्र सिंह, बंशीधर पण्डित, अमित कुमार,अभिषेक कुमार, अर्णव झा आदि उपस्थित थे.

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Published by: Anand jaswal

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