देश के थर्मल पावर प्लांटों में आने वाले महीनों में कोल स्टॉक पर दबाव बढ़ने की अनुमान है. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बिजली संयंत्रों में मौजूदा करीब 37 मिलियन टन कोयले का स्टॉक सितंबर 2026 के अंत तक घट कर 24 से 30 मिलियन टन के बीच रह सकता है.
रिपोर्ट में इसके कई कारण बताये गये हैं. मॉनसून के दौरान कोयले के मौसमी डिस्पैच में कमी, बिजली की मांग में बढ़ोतरी और सामान्य से अधिक तापमान के कारण कोयले की खपत बढ़ सकती है.
थर्मल पावर उत्पादन पर निगरानी होगी जरूरी
कोयले के संभावित स्टॉक में कमी ऐसे समय में हो सकती है, जब देश में बिजली की मांग और तापमान दोनों ऊर्जा क्षेत्र के लिए अहम बनी हुई है. यदि कोयले की आपूर्ति और खपत के बीच संतुलन बिगड़ता है, तो आने वाले महीनों में कोयला आपूर्ति और थर्मल पावर उत्पादन पर निगरानी बढ़ानी पड़ सकती है.
हालांकि, रिपोर्ट में स्टॉक में गिरावट का अनुमान जताया गया है. सितंबर के अंत तक वास्तविक स्थिति कोयले की आपूर्ति, बिजली की मांग, मौसम और परिवहन व्यवस्था पर निर्भर करेगी.
