DMFT फंड से संवरेगा SSLNT अस्पताल, 2014 से बंद IPD सेवा होगी बहाल

धनबाद के एसएसएलएनटी अस्पताल में 2014 से बंद पड़ी इनडोर सेवा जल्द बहाल होगी। डीएमएफटी फंड से अस्पताल का कायाकल्प कर प्रसव और सर्जरी की सुविधाएं शुरू की जाएंगी।

एसएसएलएनटी अस्पताल अब अपने गौरवपूर्ण अतीत की ओर लौटने की तैयारी में है. साल 2014 से बंद पड़े इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट को दोबारा शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गयी है. अस्पताल के जर्जर भवन, खराब शौचालय, पेयजल और बिजली व्यवस्था की मरम्मत के लिए डीएमएफटी से फंड उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है. साथ ही अस्पताल में बुनियादी ढांचा को मजबूत कर चरणबद्ध तरीके से बंद स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने की योजना है.

सदर अस्पताल और एसएनएमएमसीएच पर लोड घटेगा

अस्पताल के नवीनीकरण के बाद यहां फिर से मरीजों को भर्ती कर इलाज की सुविधा मिलेगी. विभाग के अनुसार आइपीडी सेवा शुरू होने से न सिर्फ मरीजों की परेशानियां कम होगी, बल्कि सदर अस्पताल और एसएनएमएमसीएच पर बढ़ते मरीजों के लोड को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा.

स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली से अस्पताल होगा गुलजार

शहर के कभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल एसएसएलएनटी अस्पताल में महिला एवं प्रसूति सेवाओं के साथ भर्ती मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था थी. अस्पताल में कई वार्ड, बेड और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा उपलब्ध थी, पर समय के साथ भवन लगातार खराब होते गये.

छतों में दरारें पड़ने लगीं, बारिश के दौरान पानी टपकने लगा और कई हिस्से असुरक्षित घोषित होने की स्थिति में पहुंच गये. बिजली व्यवस्था भी बार-बार बाधित होने लगी. शौचालयों की दुर्दशा और पेयजल संकट ने मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलें बढ़ा दीं. इन परिस्थितियों में मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए भर्ती सेवाओं को पहले सीमित किया गया और बाद में वर्ष 2014 में पूरी तरह बंद कर दिया गया.

इनडोर सेवा नहीं होने से मरीजों को किया जाता था रेफर

आइपीडी सेवा बंद होने के बाद अस्पताल में केवल ओपीडी सेवाएं संचालित होती रहीं. प्रतिदिन सैकड़ों मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, पर गंभीर मरीज को भर्ती नहीं किया जाता है. ऐसे मरीजों को मजबूरन सदर अस्पताल, एसएनएमएमसीएच या किसी निजी अस्पतालों में भेजा जाता है.

गर्भवती महिलाओं को होती है सर्वाधिक परेशानी

अस्पताल में भर्ती सुविधा बंद होने का सर्वाधिक असर महिलाओं और गर्भवती मरीजों पर पड़ रहा है. एक समय यहां सामान्य प्रसव और सिजेरियन डिलीवरी की सुविधाएं उपलब्ध थीं. बुनियादी ढांचों के बिगड़ने से चालू सेवाएं भी प्रभावित होती गयीं. फिलहाल प्रसव या सर्जरी के मामलों में दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. कई बार दूरी, भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों और परिजनों को भारी परेशानी होती है.

फंड का सपोर्ट मिलने से लंबे समय से उपयोग में नहीं आ रहे वार्डों को भी पुनः तैयार किया जायेगा ताकि भर्ती सेवा शुरू होने पर मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

आइपीडी शुरू होने पर मिलेंगी ये बड़ी सुविधाएं

ओपीडी में जांच के बाद मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजने की आवश्यकता कम होगी और उनका उपचार उसी परिसर में संभव हो सकेगा. संस्थागत प्रसव और सी-सेक्शन सेवा शुरू होने से गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी.

अस्पताल शहर के मध्य में स्थित होने के कारण आसपास के हजारों परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. स्त्री रोग, शिशु रोग, सर्जरी, ईएनटी और नेत्र चिकित्सा जैसी विशेषज्ञ सेवाओं को भी मजबूत किया जायेगा.

छोटे और मध्यम स्तर के ऑपरेशन दोबारा शुरू किए जा सकेंगे. इससे मरीजों को एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी.


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By Vicky Prasad

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