SNMMCH Dhanbad: झारखंड के तीसरे सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का हाल बेहाल, गंदे बेड पर हो रहा मरीजों का इलाज

SNMMCH Dhanbad: झारखंड के तीसरे सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में मरीजों का इलाज गंदे चादरों पर किया जा रहा है. 570 बेड के अस्पताल की लॉन्ड्री में मात्र 110 चादर धोने की क्षमता है. 400 से ज्यादा भर्ती मरीजों का गंदे बेड पर इलाज हो रहा है. 15 वर्ष पुरानी तीन मशीनों से कपड़ों की सफाई में पांच से छह घंटे लगते हैं.

SNMMCH Dhanbad: धनबाद, विक्की प्रसाद-अस्पताल में मरीजों के इलाज के साथ उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्वच्छता का ख्याल रखना आवश्यक है. अस्पताल में सफाई के साथ मरीजों के बेड पर बिछी चादरों को हर दिन बदलने का नियम है. राज्य के तीसरे सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में कुव्यवस्था का आलम यह हैं कि मरीजों का इलाज गंदे चादरों पर किया जा रहा है. ऐसा इसलिए कि एसएनएमएमसीएच के लॉन्ड्री में चादरों की सफाई की व्यवस्था 15 वर्ष पुरानी तीन मशीनों पर निर्भर हैं. समय के साथ मशीनें पुरानी होने के साथ जर्जर भी हो चुकी हैं. ये चलते-चलते बंद हो जाती हैं. मशीनों का कंप्रेशर भी कम है. इस वजह से कपड़ों की सफाइ में घंटों समय लगता है. कई बार तो ठोक-पीट कर इनसे कपड़ों की सफाई की जाती है.

हर दिन नहीं बदली जाती है मरीजों के बेड की चादर


एसएनएमएमसीएच के लॉन्ड्री में चादरों की धुलाई के लिए तीन मशीनें उपलब्ध है. एक मशीन की क्षमता 50 चादर धोने की है. वहीं दूसरे की 25 व तीसरे मशीन की क्षमता 35 चादरों की धोने की है. कुल मिलाकर तीनों मशीन से 110 चादरों की धुलाई हो सकती है. जबकि अस्पताल में कुल बेड की संख्या 570 है. 400 से ज्यादा मरीजों के बेड पर रोजाना चादर नहीं बदली जाती है.

चादरों को सुखाने में निकल जाता है पूरा दिन


लॉन्ड्री के कर्मियों के अनुसार मशीनें पुरानी होने की वजह से उसका कंप्रेशर कमजोर हो गया है. इस वजह से मशीनों में कपड़े डालने के बाद धीरे-धीरे सफाइ होती है. चादरों की सफाई के बाद इसे सुखाने में भी समय लगता है. इस प्रक्रिया में ही पूरा दिन निकल जाता है.

कई वार्डों में तीन-चार दिनों में बदले जाते हैं मरीज के बेड पर चादर


एसएनएमएमसीएच में बेड के अनुसार चादरों की संख्या पर्याप्त है. लॉन्ड्री में कपड़ों की धुलाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई वार्डों में तीन से चार दिन पर मरीज के बेड की चादरों को बदला जाता है. यह वैसे वार्ड है, जहां अस्पताल के वरीय अधिकारियों का आना-जाना कम होता है. खासकर सर्जरी, बर्न वार्ड समेत अन्य जगहों पर मरीजों के बेड पर चादर दिया ही नहीं जाता. मरीजों द्वारा चादर मांगने पर ही उपलब्ध कराया जाता है. अस्पताल के कई वार्ड में मजबूरी में मरीज अपने घर से चादर लाकर काम चलाते हैं.

पुरानी हैं लॉन्ड्री की मशीनें-वरीय प्रबंधक


लॉन्ड्री की मशीनें पुरानी हैं. इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को है. लॉन्ड्री के कर्मियों से मशीनों के साथ मैनुअल तरीके से कपड़ों की सफाइ का निर्देश दिया गया है. प्रबंधन नयी मशीन खरीदने पर विचार कर रहा है. जल्द ही इसका प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय को भेजा जायेगा.
-डॉ चंद्रशेखर सुमन, वरीय प्रबंधक, एसएनएमएमसीएच

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लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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