धनबाद. धनबाद के 140 बेड वाले श्री श्री लक्ष्मी नारायण ट्रस्ट (एसएनएलएनटी) सरकारी अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. स्वास्थ्य चिकित्सा, शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने अस्पताल को स्वतंत्र स्थापना के रूप में संचालित करने के बजाय अब जिला स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में चलाने का निर्णय लिया है. अस्पताल की प्रशासनिक निगरानी जिला स्वास्थ्य विभाग के स्तर से होगी.
विभाग ने अस्पताल का संचालन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल के रूप में करने का आदेश जारी किया है. नयी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया गया है.
124 पदों के सृजन का पहले ही हो चुका है प्रावधान
जानकारी के अनुसार, एसएनएलएनटी सरकारी अस्पताल के लिए पूर्व में सृजित पदों के अतिरिक्त चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों के कुल 124 आवश्यक पदों के सृजन संबंधी संकल्प पहले ही जारी किया जा चुका है.
ये भी पढ़ें: बोकारो, गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा के एच-1एन-1 सैंपल भी पहुंचेंगे SNMMCH, जल्द मिलेगी जांच रिपोर्ट
इन पदों पर चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता से अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
एसएनएलएनटी सरकारी अस्पताल को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल के रूप में संचालित करने का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना है. अस्पताल में प्रसव, नवजात और शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सेवाओं के संचालन पर विशेष जोर दिया जायेगा.
इसके लिए चिकित्सक, विशेषज्ञ चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी होगी. जिला स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में आने के बाद इन सेवाओं की निगरानी और संचालन को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश की जायेगी.
सिविल सर्जन के अधीन होगी प्रशासनिक जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश की प्रतिलिपि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक प्रमुख, सभी क्षेत्रीय उप निदेशक और राज्य के सभी सिविल सर्जनों को भेजी गयी है.
ये भी पढ़ें: धनबाद में 83 भारी वाहनों पर 3.11 करोड़ से अधिक टैक्स बकाया, परिवहन विभाग ने भेजा नोटिस
नयी व्यवस्था लागू होने के बाद एसएनएलएनटी अस्पताल की प्रशासनिक जिम्मेदारी सीधे सिविल सर्जन, धनबाद के अधीन होगी. इससे अस्पताल के संचालन, स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी जिला स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से की जा सकेगी.
