Dhanbad News: एचपीवी टीकाकरण में सुस्ती : धनबाद आगे, रांची और लोहरदगा सबसे पीछे

Dhanbad News: सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीका जरूरी, फिर भी लोग कम ले रहे रुचि

Dhanbad News: विक्की प्रसाद, धनबाद. सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू किया गया ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान झारखंड में अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है. 30 मार्च से राज्य के सभी 24 जिलों में शुरू हुए इस अभियान के शुरुआती छह दिनों में महज 1315 बच्चियों को ही वैक्सीन लगायी जा सकी है. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, टीकाकरण में अब तक धनबाद सबसे आगे है. वहीं, रांची और लोहरदगा की स्थिति बेहद खराब है. जून तक करीब 5.5 लाख किशोरियों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है. ऐसे में मौजूदा आंकड़े अभियान की धीमी प्रगति और जमीनी स्तर पर जागरूकता की कमी को दर्शाते हैं.

राजधानी रांची में सिर्फ आठ बच्चियों को लगी वैक्सीन :

राज्य के विभिन्न जिलों के आंकड़े देखें, तो धनबाद इस अभियान में सबसे आगे नजर आता है. यहां 358 बच्चियों को वैक्सीन दी जा चुकी है. पूर्वी सिंहभूम (159) दूसरे और पाकुड़ व जामताड़ा (120-120) संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं. दूसरी ओर कई जिले इस अभियान में बेहद पीछे हैं. राजधानी रांची में सिर्फ आठ बच्चियों को वैक्सीन दी गयी है, जबकि लोहरदगा में यह संख्या मात्र दो है. ऐसे कई जिले हैं, जो दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाये हैं.

अभिभावकों की उदासीनता और भ्रांतियां बनीं बाधा : अभियान की धीमी गति का सबसे बड़ा कारण अभिभावकों की कम भागीदारी मानी जा रही है. अधिकांश जिलों में बनाये गये वैक्सीनेशन सेंटर पर बच्चियों की उपस्थिति बेहद कम है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई अभिभावकों में वैक्सीन को लेकर भ्रांतियां हैं. कुछ लोग इसे नयी वैक्सीन मान कर डर रहे हैं. कुछ को इसके लाभ की जानकारी नहीं है. साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का भी अभाव है. इसी वजह से वैक्सीनेशन की नि:शुल्क सुविधा मिलने के बावजूद लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं.

जानें क्या है एचपीवी वैक्सीन और क्यों है जरूरी

सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा की ढाल-यह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से बचाव करती है, जो सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है

-वायरस आमतौर पर किशोरावस्था में शरीर में प्रवेश करता है और कई वर्षों बाद कैंसर का रूप ले सकता हैसरकार द्वारा दी जा रही वैक्सीन की खासियत

एक डोज, दो के बराबर असर : स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सरकार द्वारा दी जा रही वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक डोज में ही उतनी सुरक्षा प्रदान करती है, जितनी सामान्यतः बाजार में उपलब्ध दो डोज से मिलती है. यह वैक्सीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित और सुरक्षित मानी जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, नौ से 14 वर्ष की उम्र में यह वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी होती है.

स्कूलों और आंगनबाड़ी की भूमिका अहम : अभियान की गति तेज करने के लिए सरकार स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों की मदद ले रही है. स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाये जा रहे हैं. शिक्षकों को भी इसमें शामिल किया गया है. आशा और आंगनबाड़ी सेविकाओं को घर-घर जाकर जानकारी देने की जिम्मेदारी दी गयी है. इसके बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं.

जिला वार वैक्सीनेशन की स्थिति (30 मार्च से 04 अप्रैल तक)

धनबाद : 358

पूर्वी सिंहभूम : 159पाकुड़ : 120जामताड़ा : 120दुमका : 58देवघर : 48गोड्डा : 48गुमला : 45पश्चिमी सिंहभूम : 43कोडरमा : 42पलामू : 42गिरिडीह : 40लातेहार : 36बोकारो : 28खूंटी : 28सरायकेला-खरसावां : 28सिमडेगा : 24चतरा : 23साहेबगंज : 23हजारीबाग : 16रामगढ़ : 12रांची : 08गढ़वा : 07लोहरदगा : 02कुल : 1315डरें नहीं, जागरूकता जरूरी

वैक्सीन को लेकर किसी भी तरह के भ्रम में ना रहें. यह पूरी तरह सुरक्षित है. इससे भविष्य में सर्वाइकल कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है. यह बच्चियों के स्वास्थ्य में निवेश है,डॉ रोहित गौतम, डीआरसीएचओ, धनबाद

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By MANOJ KUMAR

MANOJ KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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