Dhanbad News: वरीय संवाददाता, धनबाद. छात्रों को करियर की सही दिशा दिखाने और उनके भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानने के उद्देश्य से प्रभात खबर की ओर से संचालित करियर काउंसेलिंग सत्र का आयोजन बुधवार को बरवाअड्डा स्थित सिम्बोसिस पब्लिक स्कूल में किया गया. इस अवसर पर आठवीं, नौवीं और 11वीं कक्षा की बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने अपने भविष्य, विषय चयन और पढ़ाई की रणनीति पर मार्गदर्शन प्राप्त किया. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलते करियर विकल्पों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और पढ़ाई के प्रभावी तरीकों से अवगत कराना था, ताकि वे समय रहते सही निर्णय ले सकें.
कार्यक्रम में स्कूल की पूर्व प्राचार्या इंद्राणी घोष और वर्तमान प्राचार्या विद्या सिंह विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहीं. मुख्य वक्ता जाने माने करियर काउंसेलर एवं गोल धनबाद के निदेशक संजय आनंद ने विद्यार्थियों से संवाद किया. उन्होंने सरल, व्यावहारिक और प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से छात्रों को करियर की योजना बनाने की अहम बातें समझायींआठवीं से दसवीं : भविष्य की नींव रखने का समय
संजय आनंद ने कहा कि आठवीं से दसवीं कक्षा का समय छात्रों के जीवन में अत्यंत निर्णायक होता है. इसी दौरान छात्रों को अपनी रुचि, क्षमता और पसंद के विषयों की पहचान कर लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि इस उम्र में छात्र यह तय कर लें कि वे किस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आगे चलकर उन्हें करियर को लेकर भ्रम का सामना नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि सही निर्णय वही होता है, जो छात्र की रुचि और योग्यता से मेल खाता हो. इस दौरान विद्यार्थियों ने करियर को लेकर सवाल पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से उत्तर दिया.पढ़ाई की रणनीति से तय होती है सफलता
संजय आनंद ने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में केवल पढ़ लेना ही काफी नहीं है, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि कैसे पढ़ा जाये. उन्होंने बताया कि परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए पढ़ाई की सही रणनीति सबसे बड़ा हथियार है. उन्होंने छात्रों को लिखने की गति और सटीकता पर ध्यान देने की सलाह दी. साथ ही यह भी बताया कि नियमित टेस्ट देकर उसका विश्लेषण करना बेहद जरूरी है. इससे छात्रों को अपनी कमजोरियों का पता चलता है और वे समय रहते उनमें सुधार कर सकते हैं.सफलता और असफलता की जिम्मेदारी खुद छात्रों की
संजय आनंद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हर छात्र के भीतर सफल होने की क्षमता होती है. फर्क सिर्फ इतना होता है कि कोई उसे पहचान लेता है और कोई नहीं. उन्होंने कहा कि अपनी सफलता या असफलता के लिए छात्र स्वयं जिम्मेदार होते हैं.गोल्डेन रूल : एक समय में एक विषय
पढ़ाई को प्रभावी बनाने के लिए संजय आनंद ने छात्रों को एक महत्वपूर्ण गोल्डेन रूल बताया. उन्होंने कहा कि एक समय में सिर्फ एक ही विषय पर ध्यान देना चाहिए. एक साथ कई विषयों के बारे में सोचने या पढ़ने से एकाग्रता भंग होती है और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है.एनसीइआरटी और गणित पर विशेष जोर
करियर काउंसेलिंग सत्र में एनसीइआरटी की किताबों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया. संजय आनंद ने कहा कि भारत में होने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की बुनियाद एनसीइआरटी की पुस्तकों पर ही टिकी होती है. यदि छात्र इन किताबों को गहराई से पढ़ लें, तो आगे की तैयारी आसान हो जाती है. उन्होंने गणित को प्रतियोगी परीक्षाओं की रीढ़ बताते हुए कहा कि नौवीं और दसवीं की गणित आगे की पढ़ाई से सीधे जुड़ी होती है. सीखने की निरंतर इच्छा और धैर्य के साथ सुनने की आदत किसी भी व्यक्ति के करियर को नयी दिशा दे सकती है. जब हम खुले मन से सीखते हैं, तो न केवल नया ज्ञान अर्जित करते हैं, बल्कि बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता भी विकसित करते हैं. वहीं धैर्यपूर्वक सुनना हमें दूसरों के अनुभव, सुझाव और आलोचना से सीखने का अवसर देता है.– इंद्राणी घोष,
पूर्व प्राचार्या सिम्बोसिस पब्लिक स्कूलक्लास रूम में पढ़ाई गयी बातें छात्रों को दिशा और आधार तो देती हैं, लेकिन उनका वास्तविक अर्थ और गहराई तब सामने आती है, जब छात्र स्वयं बैठकर उनका दोहराव और अभ्यास करते हैं. स्वअध्ययन के माध्यम से विषयों की समझ मजबूत होती है और ज्ञान स्थायी बनता है. यह प्रक्रिया छात्रों में अनुशासन, जिम्मेदारी और समय प्रबंधन की क्षमता विकसित करती है.– विद्या सिंह
, प्राचार्या, सिम्बोसिस पब्लिक स्कूलडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
