ज्ञापन में कहा गया है कि सवर्ण एकता मंच गिरिडीह ने यूजीसी के भेदभाव निषेध विनियमों के कुछ प्रावधानों को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है. मंच के अनुसार यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि भारत का संविधान समानता, गरिमा और न्याय का प्रबल समर्थक है और भेदभाव के विरुद्ध कठोर कदम उठाना निस्संदेह आवश्यक भी है. किंतु यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि ऐसे कानून स्वयं किसी नये प्रकार के संस्थागत अन्याय, असंतुलन या भय के वातावरण को जन्म न दें.
क्या यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 की भावना और व्याख्या के अनुरूप है?
सवर्ण एकता मंच की जिज्ञासा है कि क्या यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 की भावना और व्याख्या के अनुरूप है, क्या इनमें निष्पक्ष सुनवाई, समान प्रक्रिया और आनुपातिक दंड के समुचित प्रावधान सुनिश्चित किये गये हैं ? क्या यह विनियम न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरे उतर पाएंगे ? कहा गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के भेदभाव निषेध विनियमों में “भेदभाव ” की परिभाषा अत्यंत अस्पष्ट एवं व्यापक प्रतीत होती है. ज्ञापन सौंपने वालों में दीपक कुमार उपाध्याय, संतोष कुमार, शैलेश पांडेय, सत्येंद्र कुमार सिंह, नवल किशोर पांडेय, कुमार पल्लव भक्त, नवीन कुमार मिश्रा, विकास तिवारी, रणविजय सिंह, सौरभ सिंह, विद्याभूषण, अभिषेक मिश्रा, सुजीत सिंह, सुभम झा, अनूप कुमार आदि शामिल हैं.
