Satish Chandra Dubey: केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बिजली संकट पर हेमंत सोरेन सरकार को घेरा

Satish Chandra Dubey: केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि धनबाद समेत झारखंड में बिजली संकट दुर्भाग्यपूर्ण है. हेमंत सोरेन सरकार बिजली खरीदने के लिए पावर कंपनियों को भुगतान तक नहीं कर पा रही है.

Satish Chandra Dubey: धनबाद-केंद्रीय कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोल इंडिया के कोयले से पूरा देश रोशन हो रहा है, लेकिन दुर्भाग्य है कि झारखंड में बिजली की समस्या जस की तस है. यहां चिराग तले अंधेरा वाली स्थिति है. प्रदेश की सरकार बिजली नहीं खरीद पा रही है. जिन पावर कंपनियों से बिजली की खरीदारी करनी है, उसे झारखंड सरकार भुगतान तक नहीं कर रही है. ऐसे में धनबाद समेत पूरे झारखंड में बिजली की समस्या है. वे रविवार को धनबाद के कोयला नगर में मीडिया को संबोधित कर रहे थे.

शहीद श्रमवीरों को दी श्रद्धांजलि

इससे पहले कोयला राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कोयला नगर स्थित बीसीसीएल मुख्यालय कोयला भवन पहुंचे और शहीद स्मारक स्थल पर माल्यार्पण कर शहीद श्रमवीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की. कोयला नगर स्थित इको पार्क में पौधरोपण किया. कोयला नगर में सीआइएसएफ की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. मंत्री श्री दुबे ने कहा कि कोल इंडिया के पास झारखंड प्रदेश के विकास के लिए भी फंड है. इसके लिए प्रदेश की सरकार को मॉनिटरिंग करने की जरूरत है.

देश की जीडीपी में कोल इंडिया की 10% की सहभागिता

कोयला राज्य मंत्री ने कहा कि देश की जीडीपी में कोल इंडिया की 10 प्रतिशत सहभागिता है. कोल इंडिया विकास के पथ पर अग्रसर है. मौके पर कोल इंडिया चेयरमैन पीएम प्रसाद, बीसीसीएल सीएमडी समीरन दत्ता, निदेशक (कार्मिक) मुरली कृष्ण रमैय्या, डीएफ राकेश कुमार सहाय, निदेशक तकनीकी (परिचालन) संजय कुमार सिंह, निदेशक तकनीकी (योजना व परियोजना) एस नागचारी समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

117 साल पुरानी एना कोलियरी का लिया जायजा

कोयला राज्य मंत्री ने बीसीसीएल की एना कोलियरी का जायजा लिया. बीसीसीएल सीएमडी समीरन दत्ता ने आग के बीच हो रहे कोयला खनन की विस्तृत जानकारी दी. इस दौरान कोल इंडिया चेयरमैन समेत अन्य अधिकारी थे. एना कोलियरी में कोयला खनन का इतिहास 117 साल पुराना है, जो 1906 से शुरू हुआ था. बीसीसीएल के कोयला उत्पादन में इस कोलियरी की अहम भूमिका है. 216 हेक्टेयर में फैली इस साइट में कुल 165.50 मिलियन टन कोयले का भंडार है.

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लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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