Dhanbad News: रंगदारी के रुपये का फ्लो कम होने पर अलग-अलग काम कर रहे गुर्गे

पुलिस के लगातार किये गये एनकाउंटर के बाद प्रिंस खान के गैंग में हुआ बिखराव, रंगदारी के रुपये का फ्लो कम होने पर अलग-अलग काम कर रहे गुर्गे.

पिछले कुछ माह से धनबाद पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रिंस खान गैंग में बिखराव हो चुका है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि हाल के दिनों में पुलिस लगातार गैंग के गुर्गों को खिलाफ कार्रवाई कर रही है. लगभग आधा दर्जन एनकाउंटर किया गया है. इसके बाद प्रिंस खान व सैफी के कहने पर कोई भी अपराधी अब उनके साथ काम करने को तैयार नहीं है. अब कई लोगों ने रंगदारी देना भी बंद कर दिया है. ऐसे में रुपये का फ्लो कम होने से गैंग में बिखराव हो गया है. अब सभी अलग-अलग रह रहे हैं.

दुबई में लांड्री चलाता था सैफी

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सैफी अब्बास नकवी उर्फ मेजर यूएई के अजमान में लांड्री का संचालन कर रहा था. पिछले कई माह से वह यह कारोबार कर रहा था. जबकि दो माह से प्रिंस खान एंड ग्रुप से अलग होकर रह रहा था.

घर में बढ़ा दबाव तो किया सरेंडर

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सैफी की मां व बहन यूपी के जौनपुर जिला में रहते हैं. सैफी रंगदारी का रुपया अपनी मां व बहन को भेजता था. इसकी जानकारी मिलने पर पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी. पुलिस लगातार उसके परिवार वालों के संपर्क में थी. पुलिस की दबिश पर सैफी सरेंडर करने के लिए दुबई से इंडिया लौटा.

नन्हे हत्याकांड के बाद हुआ था फरार

वर्ष 2021 में वासेपुर में नया बाजार निवासी नन्हे खान की हत्या हुई थी, इसकी जिम्मेदारी प्रिंस खान ने ली थी. इसके बाद प्रिंस खान व उसके सभी भाई धनबाद छोड़ कर फरार हो गये थे. इस दौरान सैफी पर भी मामला दर्ज किया गया था. प्रिंस खान के दुबई भागने के कुछ माह बाद सैफी भी दुबई चला गया. उसके बाद से वह वहीं रहता था.

इलेक्ट्रिशियन का काम कर रहा रितिक

सैफी के पकड़े जाने के बाद जब एसटीएफ, आइबी व धनबाद पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने गैंग के लोगों की जानकारी दी. बताया कि गोपी का साला रितिक भी अब गैंग से अलग होकर काम कर रहा है. वह दुबई की एक कंपनी में इलेक्ट्रिशियन की नौकरी कर रहा है.

भानू मांझी था सैफी का खास गुर्गा

सैफी ने पुलिस को बताया कि जमशेदपुर का कुख्यात अपराधी भानू मांझी उसका खास गुर्गा था. उसके जरिये ही उसने राजगंज के बीरबल मंडल के पेट्रोल पंप पर गोलियां चलवायी थी, जिसमें पंप के मैनेजर व अन्य स्टॉफ बच गये थे. भानू मांझी के एनकाउंटर के बाद उसका नेटवर्क कमजोर पड़ गया और उसके बाद उसके कई लोग पकड़े गये.

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Author: ASHOK KUMAR

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