Dhanbad News: वीआइए किट खरीद घोटाला : 20 लाख रुपये की जगह 13.34 लाख की हुई खरीद, सूची से अलग उपकरणों की खरीदारी, तीन स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं पहुंचे सामान

Dhanbad News: प्रभात खबर ने 10 मई, 2025 के अंक में प्रकाशित की थी गड़बड़ी की खबर, दो सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में की घोटाले की पुष्टि

Dhanbad News: विक्की प्रसाद, धनबाद.

सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए खरीदे गये 20 लाख रुपये के वीआइए किट गायब होने से जुड़े मामले में आखिरकार जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. प्रभात खबर ने 10 मई, 2025 के अंक में ‘सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए खरीदे गये 20 लाख रुपये के वीआइए किट हो गये गायब’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी. इसके बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया था. एनएचएम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक अबू इमरान ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिये थे. एनसीडी सेल के राज्य नोडल पदाधिकारी ने सिविल सर्जन धनबाद को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने काे कहा था. 20 मई को दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया. समिति में जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ मंजू दास और जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार को शामिल किया गया. समिति को खरीद, आपूर्ति और वितरण, इन तीन बिंदुओं पर जांच करने का निर्देश दिया गया था. निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने विधानसभा में मामला उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर अनियमितता का आरोप लगाया था. इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच को और गंभीरता से लिया गया. जांच समिति ने क्रय, आपूर्ति, वितरण और भंडारण की विस्तृत जांच किसी स्वतंत्र ऑडिटर से कराने की अनुशंसा की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में सामग्री कहां गायब हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है.

क्या है टीम की जांच रिपोर्ट में

– कागजों पर पूरी हुई उपकरणों की आपूर्ति, जमीनी हकीकत कुछ और- स्वीकृत सूची से अलग उपकरणों की खरीद

– भौतिक सत्यापन में तीन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में नहीं मिले जरूरी सामान-स्वतंत्र ऑडिट की सिफारिश

घोटाले की खबर छपते ही 2.23 लाख की राशि जिला स्वास्थ्य समिति के खाते में जमा करायी

जांच में यह तथ्य सामने आया कि राज्य नोडल पदाधिकारी एनसीडी सेल द्वारा 26 जून, 2024 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए कुल 20 प्रकार की सामग्रियों की खरीद प्रस्तावित थी. लेकिन वित्तीय वर्ष 2024-25 में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से केवल 12 सामग्रियों की ही खरीद की गयी. जिसकी कुल खरीद राशि 20 लाख रुपये बतायी जा रही थी, जबकि वास्तविक रूप से 13,34,056 रुपये की ही खरीद हुई. जांच में यह भी पाया गया कि सूची में निर्धारित एलइडी व्हाइट लाइट सोर्स की जगह इएनटी हेड लाइट की खरीद की गयी. इसके अलावा एक गंभीर चूक यह रही कि स्टेनलेस स्टील ड्रम के स्थान पर गलती से 140 ग्रेन स्टोरेज बिन (अनाज भंडारण के बर्तन) की खरीदारी कर ली गयी. हालांकि, प्रभात खबर में गड़बड़ी की खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित एजेंसी से ग्रेन स्टोरेज बिन वापस कराकर 2.23 लाख रुपये की राशि जिला स्वास्थ्य समिति के खाते में जमा करायी गयी और पुनः एसएस ड्रम की खरीद की गयी.

कागजों में पूरी की गयी भंडारण प्रक्रिया

जांच समिति ने खरीद संचिका और जिला भंडार पंजी का अवलोकन किया. इसमें पाया गया कि आपूर्तिकर्ताओं द्वारा सभी खरीदी गयी सामग्रियां जिला भंडार (सेंट्रल स्टोर) में उपलब्ध करायी गयीं और भंडारपाल द्वारा उन्हें विधिवत भंडार पंजी में दर्ज किया गया. दस्तावेजों के अनुसार सामग्रियों की आपूर्ति प्रक्रिया कागजों में पूरी की गयी, लेकिन जांच में पाया गया कि वीआइए किट की सूची के अनुसार सामान स्वास्थ्य विभाग के भंडार में पहुंचे ही नहीं. खरीदारी से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित किये गये उपकरण व सामानों की पूरी प्रक्रिया तत्कालीन डीपीएम नीरज यादव व डीएएम सुबोध चंद्र महतो की देखरेख में हुई थी.

वितरण प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

जिला भंडार से धनबाद जिले के सभी सामुदायिक एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सामग्रियों का वितरण दर्शाया गया है. एसएस ड्रम की आपूर्ति धनबाद सदर, तोपचांची, बाघमारा, झरिया-सह-जोड़ापोखर और निरसा प्रखंडों में की गयी. हालांकि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों ने अब तक अपने स्तर पर संधारित भंडार पंजी की छायाप्रति उपलब्ध नहीं करायी है, जिससे वितरण की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं.

भौतिक सत्यापन में बड़ा खुलासा

जांच समिति ने धनबाद सदर के दामोदरपुर, बाघमारा के तेलमच्चो और झरिया सह जोड़ापोखर के बरारी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भौतिक निरीक्षण किया. इस दौरान सीएचओ द्वारा अधिकांश सामग्रियां प्रस्तुत की गयी, लेकिन वीआइए किट से संबंधित तीन उपकरण, अनब्रांडेड लाइट वेट, सुटेबल फॉर डाइवर्स एवं एलइडी डाइविंग टॉर्च लाइट केंद्रों पर उपलब्ध नहीं पाया गया. संबंधित सीएचओ का कहना था कि भंडार पंजी में उनसे हस्ताक्षर तो कराये गये, लेकिन यह सामग्री उन्हें वास्तव में दी ही नहीं गयी.

स्वीकृत वीआइए किट की सूची व खरीदे गये सामान में अंतर

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के लिए 20 लाख रुपये की नहीं, बल्कि केवल 13.34 लाख रुपये की ही खरीद हुई. खरीदी गयी सामग्रियों के नाम और राज्य स्तर से स्वीकृत वीआइए किट की सूची में अंतर पाया गया. अधिकतर सामग्रियां स्क्रीनिंग के लिए उपयोगी हैं, लेकिन इएनटी हेड लाइट निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है. टॉर्च लाइट की आपूर्ति और भौतिक उपलब्धता में गंभीर विसंगति है.

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