रांची के बाद अब धनबाद कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

Bomb Threat: रांची और पटना के बाद अब धनबाद कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया. 28 कोर्ट भवन खाली कराए गए और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. डॉग स्क्वॉड व मेटल डिटेक्टर से जांच जारी है. इससे पहले रांची सिविल कोर्ट और समाहरणालय को भी ईमेल से धमकी मिल चुकी है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

Bomb Threat: रांची और पटना के बाद अब धनबाद कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. धमकी की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. एहतियातन पूरे कोर्ट परिसर को तत्काल खाली करा दिया गया. सुरक्षा के मद्देनजर कोर्ट परिसर स्थित 28 कोर्ट भवनों को खाली कराया गया. सभी न्यायिक कार्यों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. मौके पर सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव और डीएसपी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहुंच गए हैं और स्थिति की निगरानी कर रहे हैं.

डॉग स्क्वॉड और मेटल डिटेक्टर से जांच

मिली जानकारी के अनुसार, कोर्ट परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. डॉग स्क्वॉड और मेटल डिटेक्टर की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. संदिग्ध वस्तुओं की जांच की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके. फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है. सुरक्षा एजेंसियां धमकी की सत्यता और स्रोत का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं.

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रांची सिविल कोर्ट और समाहरणालय को उड़ाने की धमकी

इससे पहले, 12 फरवरी 2026 को झारखंड की राजधानी रांची में समाहरणालय यानी डीसी ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. यह धमकी ई-मेल के जरिए भेजी गई, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. इससे पहले, सिविल कोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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