Dhanbad News: आयुष्मान भारत याेजना में लापरवाही से 25 लाख का भुगतान फंसा

समय पर रिपोर्ट नहीं देने पर इंश्योरेंस कंपनी ने रोकी राशि, अधीक्षक ने विभागाध्यक्षों को जारी किया सख्त निर्देश.

By ASHOK KUMAR | January 8, 2026 1:44 AM

शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े मामलों में गंभीर लापरवाही सामने आयी है. समय पर जवाब और प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने पर अस्पताल का लगभग 25 लाख रुपये का भुगतान इंश्योरेंस कंपनी ने रोक दिया है. इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन सख्त हो गया है. अधीक्षक डॉ डीके गिंदाैरिया ने सभी विभागाध्यक्षाें को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि अपने-अपने विभाग में भर्ती आयुष्मान मरीजों के केस अधिक से अधिक समय पर अपलोड व प्रोसेस करें. विभाग से संबंधित सभी पेंडिंग केस, क्वेरी और आपत्तियों का निपटारा तीन दिन के भीतर सुनिश्चित करें. इसके अलावा, आयुष्मान भारत से संबंधित साप्ताहिक प्रतिवेदन अधीक्षक कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपलब्ध करायें.

मरीजों के केस और क्वेरी बने परेशानी की वजह

अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया जाता है. इसके तहत भर्ती मरीजों के केस, इलाज से जुड़ी जानकारी और आवश्यक दस्तावेज समय-समय पर संबंधित विभागों को उपलब्ध कराये जाते हैं. जबकि कई विभागों में आयुष्मान मरीजों के केस, क्वेरी और पेंडिंग फाइलों का समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा है. ऐसे में इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मांगी गयी जानकारी, स्पष्टीकरण, उत्तर का जवाब समय पर नहीं भेजा गया. ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया अटक गयी.

समीक्षा बैठकों में असंतोषजनक प्रतिवेदन

अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि विभागों द्वारा प्रस्तुत किये जा रहे प्रगति प्रतिवेदन लगातार असंतोषजनक मिल रहे हैं. आये दिन होने वाली समीक्षा बैठकों में आयुष्मान भारत से जुड़े मामलों में पेंडेंसी की बात सामने आ रही है. इससे न केवल भुगतान प्रभावित हुआ है, बल्कि संस्थान की छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है.

लापरवाही मिलने पर उच्च अधिकारियों को दी जायेगी सूचना

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि साप्ताहिक प्रतिवेदन संतोषजनक नहीं मिला या समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया, तो इससे संबंधित सूचना सीधे उच्च अधिकारियों को भेजी जायेगी.

भुगतान रोकने से मरीजों और अस्पताल दोनों पर असर

भुगतान रुकने से अस्पताल की आर्थिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है. वहीं इस योजना के तहत इलाज कराने वाले गरीब मरीजों की सुविधाएं भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकती है.

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