बीएमएस छोड़ सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियन का अनुपमा सिंह को मिल रहा समर्थन

राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन की बैठक में बेरमो विधायक अनूप सिंह का दावा

वरीय संवाददाता, धनबाद,

राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन (आरसीएमयू) के केंद्रीय, क्षेत्रीय व शाखा पदाधिकारियों की बैठक सोमवार को बैक मोड़ स्थित एक होटल के सभागार में हुई. इसकी अध्यक्षता पूर्व मंत्री सह कार्यकारी अध्यक्ष मन्नान मल्लिक ने की. बैठक को संबोधित करते हुए बेरमो विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह ने कहा कि भाजपा ने धनबाद लोकसभा क्षेत्र से ऐसा प्रत्याशी दिया है, जो राजनीति तो भाजपा की करते हैं, परंतु यूनियन एटक की चलाते हैं, जबकि उन्हें बीएमएस में होना चाहिए था. दो नाव पर सवार हो भाजपा प्रत्याशी ना सिर्फ कोयला मजदूर, बल्कि धनबाद की जनता को भी कंफ्यूज कर रहे हैं. श्री सिंह ने कहा कि कहा कि बीसीसीएल, जो धनबाद की लाइफ लाइन है, एमडीओ की नीति के तहत इसकी सारी संपत्ति माटी के भाव चंद पूंजीपतियों के हवाले की जा रही है. भाजपा सरकार में कोल इंडिया का धीरे-धीरे निजीकरण किया जा रहा है. ऐसे में बीएमएस छोड़ सभी चारों केंद्रीय श्रमिक संगठनों का समर्थन कांग्रेस सह इंडिया महागठबंधन की प्रत्याशी अनुपमा सिंह को मिल रहा है. अनुपमा सिंह की जीत धनबाद के किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान, बेरोजगार और व्यापारियों की जीत होगी. उन्होंने कहा कि रोजगार का अवसर पैदा करना कांग्रेस प्रत्याशी अनुपमा सिंह की पहली प्राथमिकता होगी. बैठक को प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेंद्र प्रसाद सिंह, पूर्व मंत्री मन्नान मलिक, एके झा, रणधीर ठाकुर, रामप्रीत यादव, मिथलेश प्रसाद सिंह, महेंद्र सिंह, लगनदेव यादव, शशिभूषण तिवारी, संतोष महतो, वीरेंद्र अम्बष्ट, रामवृक्ष यादव आदि ने संबोधित किया. इस मौके पर जेपी यादव, वैभव सिंह, अशोक लाल, क्यूम खान, सुरेंद्र यादव, जितेंद्र शर्मा, सीता पासवान, दुर्गा दास, रामचंद्र पासवान, दयाल महतो, वीरेंद्र बाउरी, सरजू सिंह, विमलेश चौबे, संजय निषाद, कालीपद रवानी, अक्षयवर प्रसाद, विजय दुबे आदि उपस्थित थे.

राजेंद्र बाबू ने अंतिम समय तक मजदूरों की सेवा :

आरसीएमयू के कार्यकारी अध्यक्ष बृजेंद्र प्रसाद सिंह, अध्यक्ष मन्नान मलिक व महामंत्री एके झा ने कहा कि राजेंद्र बाबू ने अंतिम समय तक मजदूरों की सेवा की. धनबाद की धरती प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण है. पिछले 10 वर्ष की भाजपा सरकार ने इसे पूरी तरह से बेबस कर दिया है. श्रम शक्तियां घटा दी गयीं हैं. लोकतांत्रिक अधिकार छीना जा रहा है. कई शिक्षण संस्थानों को बंद किया गया है. बहाली के हर दरवाजे बंद कर दिए गए हैं. कोविड-19 में मृत लोग आज भी मुआवजे की राशि के लिए भटक रहे हैं. दूसरी ओर किसानों पर डंडे बरसाये गये. पूंजीपतियों के ऋण माफ किया जा रहे हैं और गरीब किसान कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहे है. इससे मुक्ति के लिए कांग्रेस प्रत्याशी को जिताना है और इंडी गठबंधन को मजबूत करना है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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