धनबाद में जल संकट और खराब पानी की गुणवत्ता से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है. अब कोलियरी क्षेत्रों में जमा पिट वाटर (खदान का पानी) को शुद्ध कर पीने योग्य बनाया जाएगा. इसके लिए आइआइटी आइएसएम के अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर (एसीआइसी) फाउंडेशन और नगर निगम के बीच समझौता हुआ है. योजना के तहत पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत पांच स्थानों पर वाटर कियोस्क स्थापित किए जाएंगे. इन कियोस्क के माध्यम से प्रतिदिन करीब एक लाख लीटर पिट वाटर को रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) तकनीक से शुद्ध कर शहर में लगभग 200 वेंडिंग मशीनों के जरिये लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा. सबसे खास बात यह है कि यह पानी मात्र 50 पैसे प्रति लीटर की दर से मिलेगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. प्रत्येक कियोस्क की स्थापना पर करीब 19 लाख 86 हजार 900 रुपये खर्च होंगे. नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने कहा कि खदानों के पिट वाटर को शुद्ध कर पीने योग्य बनाने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गयी है. एसीआइसी आइआइटी आइएसएम फाउंडेशन और धनबाद नगर निगम के बीच सहमति बनी है. पायलट प्रोजेक्ट के तहत पांच जगहों पर कियोस्क लगाए जाएंगे. स्थान चिन्हित कर एसीआइसी फाउंडेशन को उपलब्ध करा दिया गया है. कियोस्क के माध्यम से शहर में 200 वाटर एटीएम से सस्ता आरओ पानी उपलब्ध कराया जाएगा.
कहां-कहां लगेगा कियोस्क
मटकुरिया चेक पोस्ट, केंदुआ बाजार, पुटकी (प्रभु महतो चौक के पास), कतरासगढ़ रेलवे स्टेशन के समीप स्वास्तिक टॉकीज, तेतुलमारी सुभाष चौक.पहले भी हो चुका है प्रयोग
धनबाद में पिट वाटर को शुद्ध करने की यह पहली कोशिश नहीं है. वर्ष 2012 में सेंद्रा-बांसजोड़-लायाबाद क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, लेकिन तकनीकी और संचालन संबंधी समस्याओं के कारण यह सफल नहीं हो सका था. ऐसे में नए प्रोजेक्ट की सफलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.बड़ा सवाल
क्या पिट वाटर में मौजूद भारी धातुओं को पूरी तरह हटाना संभव है?मशीनों का रखरखाव और मॉनिटरिंग कौन करेगा?
क्या पहले भी ऐसे प्रोजेक्ट असफल हुए हैं?क्या गरीबों को सस्ता या मुफ्त पानी मिलेगा?
