धनबाद. लकड़का छह नंबर के रैयतों ने रविवार को भू-धंसान प्रभावित स्थल पर बैठक कर बीसीसीएल से मुआवजा और तत्काल सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की. रैयतों का कहना है कि 31 अगस्त को उनकी रैयती जमीन पर तेज आवाज के साथ भू-धंसान हुआ था. इस दौरान एक भैंस गोफ में समा गयी थी. घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है.
5.32 एकड़ जमीन पर खनन का दावा
रैयतों के अनुसार मौजा संख्या 282 में उनकी 5.32 एकड़ रैयती जमीन के नीचे बीसीसीएल एरिया-4 की चैतूडीह छह नंबर पिट से कोयला उत्खनन किया गया है. उनका आरोप है कि भूमिगत खनन के कारण जमीन के नीचे गोफ बन गया है, जिससे आसपास के घरों की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं.
रैयतों ने आशंका जतायी कि यदि समय रहते सुरक्षा के उपाय नहीं किये गये, तो इलाके में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है. प्रभावित परिवारों ने बीसीसीएल के महाप्रबंधक को आवेदन देकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
मुआवजे के साथ जमीन और पक्के मकान की मांग
रैयत परिवारों ने जमीन का उचित मुआवजा देने के साथ सुरक्षित स्थान पर समान मूल्य की जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है. इसके अलावा पक्का मकान, नागरिक सुविधाएं और रोजगार उपलब्ध कराकर पुनर्वास करने की मांग भी रखी गयी है.
रैयतों का कहना है कि उनकी जमीन और घरों की सुरक्षा को देखते हुए पुनर्वास की प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए.
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
रैयतों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो चैतूडीह कोलियरी में प्रदर्शन किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर न्यायालय की शरण लेने और खनन कार्य रोकने को लेकर आंदोलन करने की भी बात कही गयी.
बैठक में मंजू देवी, पार्वती देवी, भानु देवी, गीत देवी, बबिता देवी, रीता देवी, सुबोध कुम्हार, इंद्र कुम्हार और सुनील कुम्हार समेत अन्य रैयत मौजूद थे.
रैयतों ने आवेदन की प्रतिलिपि परियोजना पदाधिकारी, बाघमारा सीओ, डीसी, एसएसपी, बीसीसीएल सीएमडी और जिला खनन पदाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को भी दी है.
