झरिया, धनबाद : कभी अपने वैभव, सौंदर्य और भव्य आयोजनों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा झरिया राजपरिवार का करीब 300 साल पुराना लक्ष्मी-जनार्दन राधा-कृष्ण मंदिर आज जर्जर स्थिति में है. यह मंदिर राजपरिवार के करीब 400 साल पुराने राजागढ़ दुर्गा मंदिर के समीप स्थित है. कभी यहां राजपरिवार की ओर से जन्माष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता था. ढोल-नगाड़ों के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशियां मनायी जाती थीं और रात 12 बजे जन्माष्टमी पर आधारित नाटक का मंचन होता था. इस आयोजन में दूर-दूर से लोग पहुंचते थे.
समय के साथ मंदिर का गौरवशाली अतीत धूमिल होता गया और भवन जर्जर हो गया. हालांकि राजपरिवार के वंशजों ने यहां जन्माष्टमी आयोजन की परंपरा अब भी कायम रखी है. इस वर्ष झरिया के अंतिम राजा काली प्रसाद सिंह के ज्येष्ठ पुत्र महेश्वर प्रसाद सिंह की ओर से जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जायेगा. आयोजन की तैयारी मंदिर के पुजारी विश्वनाथ बनर्जी कर रहे हैं.
राजा दुर्गा प्रसाद सिंह ने कराया था मंदिर का निर्माण
मंदिर में करीब 40 वर्षों से पूजा करा रहे पुजारी विश्वनाथ बनर्जी बताते हैं कि झरिया के तत्कालीन राजा दुर्गा प्रसाद सिंह ने अपनी पत्नी उषा सिंह के कहने पर लक्ष्मी-जनार्दन राधा-कृष्ण मंदिर का निर्माण कराया था. इसके बाद से प्रत्येक वर्ष यहां जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित किया जाता रहा है.
जर्जर हो रही हैं पुरानी इमारतें
समय बीतने के साथ मंदिर और इसके आसपास स्थित पुरानी आलीशान इमारतें भी जर्जर होकर ढहने लगी हैं. मंदिर परिसर में गंदगी का भी अंबार लगा है. स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में पहल करनी चाहिए.
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि मंदिर और इसके आसपास के पुराने भवनों का संरक्षण किया जाये, तो यह क्षेत्र ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है.
