Dhanbad News: बेसिक रिसर्च को प्रोडक्ट व उपयोगी परिणामों में बदलना आवश्यक : प्रो. कामकोटि
आइआइटी आइएसएम में उत्साह, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं के साथ हुआ 'इन्वेंटिव 2026' का समापन
By ASHOK KUMAR | Updated at :
आइआइटी आइएसएम में आयोजित इन्वेंटिव 2026 का समापन मंगलवार को उत्साह, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं के साथ हो गया. इस दो दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन नवाचार, डिजिटल हेल्थ, शोध और उद्योग-संस्थान सहयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गयी. कार्यक्रम ने “भारत इनोवेट्स” के विजन को मजबूती देते हुए देश को आत्मनिर्भर व तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में ठोस संदेश दिया.
नवाचार में भारत की विविधता सबसे बड़ी ताकत
मंगलवार को मुख्य आकर्षण आइआइटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि का इंटरएक्टिव सत्र रहा. उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. यहां विकसित किये गये समाधान न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं. उन्होंने स्वदेशी वैक्सीन निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता व आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. केवल बेसिक रिसर्च तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे प्रोडक्ट और समाज के लिए उपयोगी परिणामों में बदलना आवश्यक है. इससे लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है.
मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम की जरूरत
प्रो. कामकोटि ने अपने संबोधन में एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया, जो रिसर्च, बौद्धिक संपदा (आइपी) और स्टार्टअप्स पर आधारित हो. बताया कि आइआइटी मद्रास में बड़े पैमाने पर रिसर्च प्रोजेक्ट्स, पेटेंट और स्टार्टअप इनक्यूबेशन पर काम हो रहा है. उन्होंने छात्रों को इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग अपनाने और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. कहा कि आने वाले समय में वही संस्थान और छात्र आगे बढ़ेंगे, जो पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर नये विचारों को अपनाएंगे.
डिजिटल हेल्थ बनेगा भविष्य का आधार
कार्यक्रम के दूसरे प्रमुख सत्र में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ डॉ सुनील कुमार बरनवाल ने “डिजिटल हेल्थ नेशन” विषय पर चर्चा की. कहा कि भारत में डिजिटल हेल्थ क्रांति की अपार संभावनाएं हैं. इसके लिए मानसिक बाधाओं, पुराने सिस्टम व क्षमता से जुड़ी चुनौतियों को दूर करना जरूरी है. उन्होंने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत एबीएचए आइडी, डेटा शेयरिंग और यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस की अहमियत को समझाया. वहीं भरोसा, गोपनीयता और सहमति को डिजिटल हेल्थ सिस्टम की नींव बताते हुए कहा कि यह पहल भविष्य में यूपीआई जैसी क्रांति ला सकती है.
प्रतिभागियों ने मुनीडीह अंडरग्राउंड माइंस का किया दौरा
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बीसीसीएल के मुनीडीह अंडरग्राउंड माइंस का शैक्षणिक दौरा भी कराया गया. इस दौरान उन्होंने माइनिंग ऑपरेशंस को करीब से समझा. इसके अलावा प्रतिभागियों ने जियोलॉजिकल म्यूजियम और सिस्मोलॉजिकल ऑब्जर्वेटरी का भी भ्रमण किया.
एक हजार से अधिक प्रतिभागी और 190 नवाचार शामिल
समापन सत्र में डीन (आरएंडडी) और संयोजक प्रो. पार्थसारथी दास ने संस्थान, उद्योग, निवेशकों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया. आयोजन सचिव प्रो. एजाज अहमद ने बताया कि कार्यक्रम में 1000 से अधिक प्रतिभागियों और 190 नवाचारों की भागीदारी रही. उप निदेशक प्रो. धीरज कुमार ने ‘थ्रीसी–थ्रीआइ–थ्रीएम’ मॉडल के माध्यम से सहयोग व नवाचार को आगे बढ़ाने की बात कही.
शताब्दी वर्ष में बड़ी उपलब्धि
संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि पांच आइआइटी के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम नयी ऊंचाइयों तक पहुंचा है. उन्होंने इसे संस्थान के शताब्दी वर्ष में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. वहीं सिंफर के निदेशक प्रो. एके मिश्रा ने सतत व उद्देश्यपूर्ण नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया.