धनबाद. गोविंदपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में कदम रखते ही सरकारी भवनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़ा होता है. परिसर में बीडीओ और सीओ के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बनाये गये आवासीय भवन एक साल से अधिक समय पहले विभागीय ठेकेदार द्वारा हैंडओवर किये जा चुके हैं, लेकिन अब तक इनका उपयोग नहीं हो रहा है. बीडीओ और सीओ दोनों ही नये सरकारी आवास में शिफ्ट नहीं हुए हैं. ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किये गये भवन फिलहाल खाली पड़े हैं.
नये आवासीय भवन का निर्माण अधिकारियों के मुख्यालय में रहने की व्यवस्था को ध्यान में रखकर कराया गया था. भवन निर्माण पूरा होने और हैंडओवर के बाद भी अधिकारियों के वहां नहीं रहने से इसके उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
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पुराने क्वार्टर में रह रहे बीडीओ
बीडीओ करीब तीन वर्षों से प्रखंड परिसर स्थित पुराने सरकारी क्वार्टर में रह रहे हैं. बताया गया कि इस पुराने आवास की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किये गये थे. अब नया आवास बनकर तैयार होने के बाद भी बीडीओ का पुराने क्वार्टर में रहना चर्चा का विषय बना हुआ है.
स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि जब बीडीओ और सीओ के लिए नया आवास बनाया जाना था, तो पुराने बीडीओ आवास की मरम्मत पर इतनी राशि खर्च करने की आवश्यकता क्यों पड़ी. हालांकि, नये भवन में अधिकारियों के शिफ्ट नहीं होने के कारणों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आयी है.
जर्जर आवास के बाद भी किराये के मकान में सीओ
सीओ का पुराना सरकारी आवास पहले से जर्जर स्थिति में था और उसे रहने योग्य बनाने के लिए मरम्मत कराना मुश्किल माना जा रहा था. इसके बाद सीओ के किराये के मकान में रहने की स्थिति बनी. इसी क्रम में प्रखंड परिसर में नया सरकारी आवास तैयार कराया गया.
इसके बावजूद वर्तमान सीओ रतनपुर क्षेत्र में किराये के मकान में रह रहे हैं. इससे यह सवाल उठ रहा है कि प्रखंड कार्यालय परिसर में तैयार सरकारी आवास में अब तक शिफ्टिंग क्यों नहीं हुई. यदि भवन में कोई कमी है, तो उसे दूर करने की दिशा में क्या कार्रवाई हुई और यदि भवन रहने योग्य है, तो उसके उपयोग में देरी क्यों हो रही है, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है.
मुख्यालय में रहने का है निर्देश
बीडीओ और सीओ जैसे प्रखंड स्तरीय अधिकारियों के मुख्यालय में रहने का प्रावधान प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका उद्देश्य ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आसानी से अधिकारियों तक पहुंच उपलब्ध कराना और जरूरी मामलों में त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करना है.
ऐसे में प्रखंड कार्यालय परिसर में ही अधिकारियों के लिए आवास उपलब्ध होने के बावजूद उनके वहां नहीं रहने को लेकर स्थानीय लोगों में सवाल उठ रहे हैं.
पेड़ काटे गये, पुराने भवन भी ढहाये गये
नये आवासीय भवन के निर्माण के लिए प्रखंड परिसर में पुराने जर्जर भवनों को ढहाया गया था. निर्माण के दौरान दर्जनों पेड़ भी काटे गये. इसके बाद करोड़ों रुपये की लागत से अधिकारियों के लिए नया आवासीय भवन तैयार कराया गया.
अब भवन निर्माण पूरा होने और हैंडओवर के एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उसके उपयोग में नहीं आने से सरकारी राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से नये आवास के उपयोग में देरी के कारणों को स्पष्ट करने और भवन का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने की मांग की है.
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