धनबाद. टुंडी प्रखंड के गादी टुंडी में वन एवं पर्यावरण विभाग के रेस्ट हाउस निर्माण की योजना में काम की वास्तविक स्थिति और भुगतान से जुड़े विभागीय दस्तावेजों के बीच अंतर सवाल खड़े कर रहा है. करीब दो वर्ष पहले तैयार इस योजना के लिए 49 लाख 98 हजार रुपये स्वीकृत किये गये थे. योजना के अनुसार मार्च 2026 तक निर्माण कार्य पूरा किया जाना था. लेकिन सितंबर 2026 तक भी भवन अधूरा पड़ा है. दूसरी ओर, विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार मार्च 2026 में ही योजना की पूरी स्वीकृत राशि 49 लाख 98 हजार रुपये विभिन्न मदों में निकाल ली गयी. दस्तावेजों में तत्कालीन प्रभारी आरएफओ के हस्ताक्षर से निकासी का उल्लेख है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मार्च 2026 में फिटिंग, फिक्सिंग, टाइल्स, पुट्टी और प्लास्टिक इमल्शन पेंट जैसे कार्यों के लिए भी भुगतान दर्ज है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब निर्धारित समय-सीमा तक भवन का निर्माण पूरा नहीं हुआ और सितंबर में भी भवन अधूरा है, तो इन कार्यों के एवज में भुगतान किस आधार पर किया गया. क्या भुगतान से पहले कार्यों का भौतिक सत्यापन और मापी की गयी थी, यह भी जांच का विषय है.
ये भी पढ़ें: धनबाद के किसानों के लिए खास योजना: कम जमीन में मिर्च-पपीता की खेती से कैसे होगी बंपर कमाई?
25 दिनों के फिटिंग-टाइल्स कार्य का भुगतान
विभाग में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार एक मार्च से 25 मार्च 2026 के बीच फिटिंग, फिक्सिंग और टाइल्स बिछाने का कार्य किया गया. इसके एवज में भरत विश्वकर्मा को 76 हजार 111 रुपये के भुगतान का उल्लेख है. दस्तावेज में कार्य की अवधि और भुगतान दोनों दर्ज हैं. वहीं, मौके पर रेस्ट हाउस का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ है. ऐसे में यह जांच जरूरी है कि संबंधित कार्य वास्तव में कितनी मात्रा में और किस स्तर तक पूरा हुआ था तथा भुगतान से पहले उसका सत्यापन किस अधिकारी या कर्मी ने किया.
पुट्टी के लिए 61,456 रुपये का भुगतान
रिकॉर्ड में एक मार्च से 15 मार्च 2026 के बीच पुट्टी का कार्य किये जाने का भी उल्लेख है. इसके लिए गोविंद कुमार गुप्ता को 61 हजार 456 रुपये का भुगतान दर्ज है. यह भुगतान भी उस समय का है, जब योजना की निर्धारित समय-सीमा मार्च 2026 थी. भवन की मौजूदा स्थिति और दस्तावेजों में दर्ज कार्य के बीच अंतर को देखते हुए इस भुगतान की भी जांच जरूरी है.
अधूरे भवन में पेंटिंग के लिए 1.23 लाख
विभागीय रिकॉर्ड में प्लास्टिक इमल्शन पेंट के कार्य के लिए राहुल ठाकुर को एक लाख 23 हजार 700 रुपये का भुगतान किये जाने का उल्लेख है. यानी मार्च में ही फिटिंग, टाइल्स, पुट्टी और पेंट जैसे कार्यों के लिए भुगतान दर्ज किया गया. दूसरी ओर, सितंबर तक भवन का निर्माण अधूरा है. यही अंतर भुगतान प्रक्रिया और कार्य की वास्तविक प्रगति को लेकर सवाल खड़े कर रहा है.
चेक और आरटीजीएस से हुआ भुगतान
दस्तावेजों में विभिन्न मदों की राशि अलग-अलग चेक और आरटीजीएस के माध्यम से संबंधित ठेकाकर्मियों को भुगतान किये जाने का उल्लेख है. पूरी योजना के लिए 49 लाख 98 हजार रुपये स्वीकृत थे और रिकॉर्ड के अनुसार मार्च 2026 में पूरी राशि की निकासी कर ली गयी.
सरकारी निर्माण कार्यों में भुगतान की प्रक्रिया सामान्यतः कार्य की प्रगति, मापी और सत्यापन से जुड़ी होती है. ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पूरी राशि की निकासी किस आधार पर की गयी. साथ ही, भुगतान से पहले कार्यों की मापी और मौके पर भौतिक सत्यापन किस स्तर पर किया गया, इसका रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए.
रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान जरूरी
मामले में मापी पुस्तिका, कार्य प्रगति रिपोर्ट, भुगतान विपत्र, चेक व आरटीजीएस विवरण और संबंधित अधिकारियों के सत्यापन रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दस्तावेजों में दर्ज कार्य कब और कितनी मात्रा में हुए तथा उनके आधार पर भुगतान किस अधिकारी की अनुशंसा या सत्यापन के बाद किया गया.
तत्कालीन प्रभारी आरएफओ के हस्ताक्षर से राशि की निकासी होने का उल्लेख विभागीय दस्तावेजों में है. ऐसे में पूरी भुगतान प्रक्रिया की विभागीय जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मार्च में पूरी राशि की निकासी किस आधार पर हुई और भवन के सितंबर तक अधूरे रहने की स्थिति में निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति क्या थी.
अधिकारियों के ठहरने के लिए बनी थी योजना
गादी टुंडी में रेस्ट हाउस बनाने की योजना का उद्देश्य वन क्षेत्र के निरीक्षण, गश्त और विभागीय कार्यों के दौरान अधिकारियों-कर्मचारियों के ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराना था. दूरदराज के वन क्षेत्रों में रात में रुकने की सुविधा मिलने से नियमित निरीक्षण, वन क्षेत्र की निगरानी, सर्वेक्षण और अन्य विभागीय गतिविधियों को सुगम बनाने की योजना थी.
डीएफओ बोले, जानकारी लेकर ही बता पाऊंगा
विकास पालीवाल, डीएफओ, धनबाद ने कहा, मामले की जानकारी नहीं है. संबंधित विभाग से दस्तावेजों की जांच कराने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा. अगर गड़बड़ी हुई है, तो निश्चित रूप से कार्रवाई होगी.
ये भी पढ़ें: झारखंड समेत 9 राज्यों में 25 नए कोयला ब्लॉक की नीलामी शुरू, जानें आपकी नौकरी और निवेश पर क्या पड़ेगा असर
