धनबाद की नदियों में सालों से गिर रहा गंदा पानी अब थमेगा. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना के तहत धनबाद में सीवरेज और इंटरसेप्शन-डायवर्जन परियोजना अब रफ्तार पकड़ने लगी है. राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, झारखंड के निर्देश पर 18 व 60 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है. पहले चरण में रामपुर (कतरी नदी) में 18 एमएलडी और परसबनिया (जोरिया नाला) में 60 एमएलडी क्षमता के एसटीपी बनाये जायेंगे. यह परियोजना न सिर्फ गंगा बेसिन की नदियों को प्रदूषण से बचाने का प्रयास है, बल्कि शहर के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य सुधार में भी अहम भूमिका निभायेगी. जिले में कुल पांच स्थानों पर 192 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माण की योजना है.
पहले जमीन, फिर प्लांट: तय हो गयी डेडलाइन
रामपुर (कतरी नदी) में बनने वाले 18 एमएलडी एसटीपी के लिए 16.60 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं. भू-अर्जन विभाग को 15 अप्रैल तक जमीन उपलब्ध कराने का टारगेट दिया गया है. वहीं परसबनिया (जोरिया नाला) में बनने वाले 60 एमएलडी प्लांट के लिए 30 मई तक भूमि अधिग्रहण पूरा करना है. प्रशासन को मुआवजा और एनओसी की प्रक्रिया तेजी से निपटाने के निर्देश दिये गये हैं.नदियों में गंदे पानी के प्रवाह पर लगेगा ब्रेक
वर्तमान में धनबाद के दामोदर, कतरी व जमुनिया समेत अन्य नदियों में शहरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे पहुंचता है. इससे प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. एसटीपी के जरिए इस पानी का शोधन कर साफ पानी ही नदी में छोड़ा जायेगा, जिससे जल गुणवत्ता और पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार होगा. वर्तमान में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दामोदर में तय मानक से चार गुना, कतरी में पांच गुना और जमुनिया में तीन गुना अधिक प्रदूषण है.इंटरसेप्शन-डायवर्जन से बदलेगी व्यवस्था
परियोजना के तहत नालों को इंटरसेप्ट कर पाइपलाइन के जरिए एसटीपी तक जोड़ा जायेगा. यानी अब गंदा पानी सीधे नदी में जाने के बजाय पहले ट्रीट होगा. झारखंड के रांची, फुसरो और जमशेदपुर में भी इसी तरह की परियोजनाएं लागू करने की योजना है. इससे पूरे राज्य में शहरी स्वच्छता को मजबूत किया जा सके.क्यों जरूरी है योजना
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण सीवेज की मात्रा लगातार बढ़ रही है. पर्याप्त सीवरेज नेटवर्क नहीं होने से यह गंदा पानी नदियों में पहुंचकर उन्हें प्रदूषित करता है. नमामि गंगे जैसी योजनाएं इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती हैं. देशभर में 160 से अधिक सीवरेज परियोजनाएं संचालित हैं.प्रोजेक्ट की झलक
– कुल लागत : 518 करोड़ रुपये- 197.3 किमी पाइपलाइन बिछेगीफ्तार
कहां बनेंगे एसटीपी
रामपुर (कतरी नदी) : 18 एमएलडीपांडरकलानी (वासुदेव नदी) : 21 एमएलडीपेटिया जामाडोबा (मटकुरिया नाला) : 75 एमएलडी
परसबनिया (जोरिया नाला) : 60 एमएलडीढांगी (बलियापुर नाला) : 18 एमएलडीग्राउंड रियलिटी: कितना प्रदूषण?
(केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार )नदी प्रदूषण स्तर (बीओडी) दामोदर 2.5 – 8 एमजी प्रति लीटरकतरी नदी 5 – 10 एमजी प्रति लीटर जमुनिया नदी 3 – 6 एमजी प्रति लीटरमानक
2 एमजी प्रति लीटर तक : सुरक्षित पीने योग्य
3–6 एमजी प्रति लीटर :प्रदूषित6 एमजी प्रति लीटर : गंभीर प्रदूषण
