वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का भाजपा पर हमला, राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग की जताई आशंका

Rajya Sabha Election: धनबाद में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई. उन्होंने कहा कि महागठबंधन मजबूत स्थिति में है. साथ ही भाषा नियमावली में सुधार, सभी क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मान और कांग्रेस संगठन में व्यक्तिगत विवाद नहीं होने की बात भी कही. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

धनबाद से प्रतीक पोपट की रिपोर्ट

Rajya Sabha Election: झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इसी बीच धनबाद दौरे पर पहुंचे राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त की राजनीति करने की तैयारी कर रही है. उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है, फिर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति इस बात की ओर इशारा करती है कि वह विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग के जरिए चुनावी समीकरण बदलने का प्रयास कर सकती है. धनबाद स्थित सर्किट हाउस में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किए जाने के बाद पत्रकारों से बातचीत में वित्त मंत्री ने राज्यसभा चुनाव, कांग्रेस संगठन में मतभेद और झारखंड में चल रहे भाषा विवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी.

भाजपा के पास नहीं है पर्याप्त संख्या बल: राधाकृष्ण किशोर

वित्त मंत्री ने कहा कि झारखंड विधानसभा में वर्तमान राजनीतिक स्थिति महागठबंधन के पक्ष में है. उनके अनुसार झामुमो, कांग्रेस, राजद और वामदलों को मिलाकर महागठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 मतों की आवश्यकता होती है और इस लिहाज से महागठबंधन पूरी तरह मजबूत स्थिति में है. उन्होंने कहा कि यदि भाजपा संख्या बल के अभाव के बावजूद चुनाव मैदान में उतरती है तो यह आशंका स्वाभाविक है कि वह चुनाव को प्रभावित करने के लिए खरीद-फरोख्त का रास्ता अपना सकती है. हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि महागठबंधन के विधायक एकजुट हैं और किसी प्रकार की राजनीतिक साजिश सफल नहीं होगी.

कांग्रेस उतारेगी उम्मीदवार

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि पार्टी अपना उम्मीदवार उतारने के पक्ष में है. हालांकि उम्मीदवार के नाम और अंतिम रणनीति पर फैसला कांग्रेस आलाकमान ही करेगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन चुनावी तैयारियों में जुटा हुआ है और गठबंधन सहयोगियों के साथ समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा चुनाव केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह गठबंधन की एकजुटता और मजबूती की भी परीक्षा होगी.

प्रदेश अध्यक्ष से व्यक्तिगत विवाद से किया इनकार

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और उनके बीच कथित मतभेदों को लेकर भी वित्त मंत्री ने अपनी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है. जो भी मतभेद हैं, वे केवल पार्टी की नीतियों और कार्यशैली को लेकर हैं. राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि लोकतांत्रिक दलों में विचारों का आदान-प्रदान और विभिन्न मुद्दों पर राय रखना सामान्य बात है. इसे व्यक्तिगत विवाद के रूप में देखना उचित नहीं होगा. उन्होंने कहा कि पार्टी हित सर्वोपरि है और सभी नेता संगठन को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं.

भाषा विवाद नहीं, नियमावली में हुई चूक: मंत्री

झारखंड में भाषा नियमावली को लेकर जारी विवाद पर भी वित्त मंत्री ने विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि इसे विवाद कहना सही नहीं होगा, बल्कि यह एक प्रशासनिक चूक का मामला है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे के समाधान के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसकी महत्वपूर्ण बैठक तीन जून को प्रस्तावित है. उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति सभी पक्षों की राय सुनकर ऐसा समाधान निकालेगी, जिससे किसी भी भाषा समूह की भावनाएं आहत न हों और विद्यार्थियों के हित भी सुरक्षित रहें.

सभी क्षेत्रीय भाषाओं को मिले सम्मान

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि झारखंड के कई जिले बिहार की सीमा से सटे हुए हैं, जहां भोजपुरी, मैथिली और अंगिका जैसी भाषाएं बड़ी संख्या में बोली जाती हैं. ऐसे में इन भाषाओं को भी समान सम्मान और अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि जनजातीय भाषाओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन जिन क्षेत्रों में किसी विशेष भाषा के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जहां उस भाषा में पढ़ाई नहीं होती और छात्र भी उस भाषा से परिचित नहीं हैं, वहां उसे अनिवार्य बनाना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता.

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राजनीति में नई बहस छेड़ गया बयान

राज्यसभा चुनाव में भाजपा पर लगाए गए आरोप, कांग्रेस संगठन में मतभेदों को लेकर दी गई सफाई और भाषा नियमावली में बदलाव की मांग के साथ वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का यह बयान झारखंड की राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है. अब राजनीतिक दलों की नजर राज्यसभा चुनाव की रणनीति और तीन जून को प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति की बैठक पर टिकी हुई है, जहां कई अहम मुद्दों पर आगे की दिशा तय हो सकती है.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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