Dhanbad News : बरमसिया फ्लाइओवर की गार्डवाल की मरम्मत शुरू, जिम्मेदारी को लेकर रेलवे और आरसीडी आमने-सामने

रेल अधिकारियों का कहना है कि फ्लाइओवर तक की जिम्मेदारी रेलवे की है, लेकिन एप्रोच रोड और उससे जुड़े ढांचे की मरम्मत राज्य सरकार को करनी चाहिए.

बरमसिया फ्लाइओवर से सेंट्रल स्कूल जानेवाले एप्रोच रोड की क्षतिग्रस्त गार्डवाल की मरम्मत का काम शुरू हो गया है. रेलवे मिट्टी खिसकने से रोकने के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से में बालू के बोरे भरवा रहा है. हालांकि शुक्रवार को भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि टूटी गार्डवाल की स्थायी मरम्मत कौन करायेगा. इसको लेकर रेलवे और पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) आमने-सामने हैं. रेल अधिकारियों का कहना है कि फ्लाइओवर तक की जिम्मेदारी रेलवे की है, लेकिन एप्रोच रोड और उससे जुड़े ढांचे की मरम्मत राज्य सरकार को करनी चाहिए. दूसरी ओर, आरसीडी के कार्यपालक अभियंता मिथिलेश प्रसाद का कहना है कि फ्लाइओवर और एप्रोच रोड दोनों 2004 में रेलवे ने खुद बनवाया था और जमीन भी रेलवे की है, इसलिए गार्डवाल की मरम्मत रेलवे को ही करनी चाहिए. इस बीच, फ्लाइओवर से भारी वाहनों का परिचालन लगातार जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि गार्डवाल की मरम्मत में देरी हुई, तो एप्रोच रोड कभी भी धंस सकता है. इससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो जायेगा.

एसडीएम के नेतृत्व में टीम आज करेगी निरीक्षण :

एसडीएम राजेश कुमार ने शुक्रवार को बताया कि फ्लाइओवर की स्थिति की समीक्षा के लिए शनिवार को स्थल निरीक्षण किया जायेगा. शुक्रवार को रेलवे ने अस्थायी रूप से बालू के बोरे डालकर मिट्टी के खिसकाव को रोका है. आरसीडी ने लिखित रूप से बताया है कि ब्रिज को कोई खतरा नहीं है. निरीक्षण के बाद रेलवे और आरसीडी के साथ संयुक्त बैठक कर आगे की कार्ययोजना तय की जायेगी.

गार्डवाल की मरम्मत से पुल पर लगा जाम :

मरम्मत कार्य के चलते शुक्रवार को बरमसिया फ्लाइओवर पर भारी ट्रैफिक देखने को मिला. बैरिकेडिंग के कारण एक ही लेन से वाहन गुजर रहे थे. इससे पूर्वाह्न 10 से 11 बजे, दोपहर 2 से अपराह्न 3 बजे और शाम 5 से रात 8 बजे तक लंबा जाम लगा रहा. इधर, एफसीआइ के मंडल प्रबंधक चक्रपाणी सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया है कि फ्लाइओवर से एफसीआइ के भारी वाहन नहीं चलते हैं. एफसीआइ के ट्रक रानी रोड, आमटाल होते हुए बलियापुर मार्ग से आते-जाते हैं. ट्रक का फ्लाइओवर रूट है ही नहीं. संभवतः फ्लाइओवर से गुजरने वाले भारी वाहन स्टेट फूड कॉरपोरेशन के हो सकते हैं.

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Published by: Narendra kumar singh

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