Dhanbad News : इ-संजीवनी टेली कंसलटेंसी में नहीं सुधर रहा धनबाद का प्रदर्शन, मुख्यालय ने मांगी रिपोर्ट

तीन सालों से लगातार गिर रहे ग्राफ पर सीएस को दूसरी बार किया गया शोकॉज, इ-संजीवनी टेली कंसलटेंसी के तहत ग्रामीण इलाके के मरीजों को दिया जाता है ऑनलाइन चिकित्सीय परामर्श

सुदूर ग्रामीण इलाकों के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से शुरू की गयी इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा धनबाद में नहीं सुधर रही है. इसे लेकर स्वास्थ्य चिकित्सा, शिक्षा व परिवार कल्याण विभाग ने एक बार फिर धनबाद स्वास्थ्य विभाग को शोकॉज करते हुए रिपोर्ट मांगी है. विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा में धनबाद जिला राज्य के 24 जिलों में 17वें स्थान पर है. अप्रैल 2024 से मई 2025 तक धनबाद जिले के विभिन्न हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में सिर्फ 22 हजार 816 मरीजों को इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के तहत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी गयी. वहीं अप्रैल 2023 से मार्च 2024 में 27 हजार 850 मरीजों को चिकित्सीय परामर्श दिया गया था. इसी तरह अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक जिलेभर में 39 हजार 939 मरीजों को इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन के तहत ऑनलाइन कंसलटेंसी सेवा प्रदान की गयी थी. बता दें कि इससे पहले मई, 2024 में भी योजना को लेकर खराब प्रदर्शन के मामले में स्वास्थ्य मुख्यालय ने सीएस को शोकॉज किया था. इसके बाद योजना की मॉनीटरिंग के लिए नियुक्त नोडल पदाधिकारी को हटाया गया था. जिले में इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा का लगातार गिर रहे ग्राफ को देखते हुए सीएस को शोकॉज किया गया है.

योजना को लेकर की गयी है 58 चिकित्सकों की नियुक्ति :

मरीजों को इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के तहत चिकित्सीय परामर्श देने के लिए 58 चिकित्सकों की नियुक्ति की गयी है. हर दिन एक चिकित्सक को औसतन 10 मरीजों को टेली कंसलटेशन (वीडियो कांफ्रेंसिंग) के जरिए चिकित्सीय परामर्श देना अनिवार्य है.

चिकित्सकों के ऑफलाइन होने के कारण सेवा से वंचित हो रहे मरीज :

इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के तहत जिले के खराब प्रदर्शन का कारण चिकित्सकों का ऑफलाइन रहना है. इस वजह से मरीजों को चिकित्सीय परामर्श नहीं मिल पा रहा है.

जानिए, क्या है इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा :

इ-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से लोगों को नजदीकी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ऑनलाइन ओपीडी डॉक्टर परामर्श दिया जाता है. उपस्थित सीएचओ की ओर से रजिस्टर्ड चिकित्सकों से बात करा कर मरीज का इलाज किया जाता है. इसे आयुष्मान भारत स्वास्थ्य के तहत संचालित किया जा रहा है.

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By Narendra kumar singh

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