शहरों में सीमित जगहों का उपयोग कर सब्जी और उद्यानिकी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए जिला उद्यान विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ‘प्रोमोशन ऑफ अर्बन फार्मिंग’ उपयोजना शुरू की है.
इसके तहत शहरी क्षेत्रों में घरों, छतों, छोटे भूखंडों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर खेती को प्रोत्साहित किया जायेगा. इसके लिए आवश्यक सामग्री की आपूर्ति चयनित कार्यकारी संस्थाओं से करायी जायेगी.
निविदा में 50 हजार की जमानत राशि जरूरी
योजना के लिए सामग्री आपूर्ति करने की इच्छुक एजेंसियों को निविदा के साथ 50 हजार रु का बैंक ड्राफ्ट या बैंकर चेक जिला उद्यान पदाधिकारी, धनबाद के पक्ष में जमा करना होगा. निर्धारित राशि के बिना निविदा पर विचार नहीं किया जायेगा. तकनीकी जांच में योग्य पायी जाने वाली एजेंसियों की वित्तीय निविदा इसके बाद खोली जायेगी.
जीएसटी समेत आयकर रिटर्न तक के पेपर चाहिए
निविदा में भाग लेने वाली एजेंसियों को कई जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे. इनमें जीएसटी निबंधन प्रमाणपत्र, अद्यतन जीएसटीआर-3बी, पिछले तीन वर्षों का आयकर रिटर्न, राष्ट्रीय उद्यानिकी बोर्ड का प्रमाणपत्र और उद्यान निदेशालय से चयनित संस्था होने का प्रमाण शामिल है. इसके अलावा आधार, पैन तथा संस्था के काली सूची में शामिल नहीं होने संबंधी नोटरी शपथपत्र भी देना होगा. दस्तावेजों की जांच के बाद ही वित्तीय निविदा के लिए पात्रता तय होगी.
बढ़ते शहरीकरण के बीच अर्बन फार्मिंग पर जोर
शहरी आबादी बढ़ने के साथ शहरों में खेती की संभावनाओं पर भी जोर बढ़ा है. विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत की करीब 35.7 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रह रही थी. 2015 में यह आंकड़ा करीब 32.5 प्रतिशत था.
छतों पर खेती का बढ़ रहा चलन
भारतीय कृषि प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन में शहरी कृषि के तरीकों का विश्लेषण किया गया है. इसमें 44.44 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने छतों पर थैलों और कंटेनरों में खेती करने की जानकारी दी. वहीं 21.11 प्रतिशत ने घर के बगीचे और 15.56 प्रतिशत ने किचन गार्डन में खेती की. धनबाद में योजना के तहत सामग्री उपलब्ध होने से शहरी परिवारों को घरेलू स्तर पर सब्जी उत्पादन से जोड़ने के साथ ताजा उपज और अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़ सकते हैं.
