धनबाद जिले में बढ़ते अपराध पर लगाम कसने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. जिले में सक्रिय व चिह्नित अपराधियों पर पैनी नजर रखने के लिए धनबाद पुलिस ने कुल 830 अपराधियों का सर्विलांस प्रोसिडिंग (निगरानी प्रस्ताव) पूरा किया है. पुलिस ने जिन अपराधियों को सर्विलांस प्रोसिडिंग के दायरे में लाया है, उनमें चोरी, लूट, डकैती, गृह भेदन, छिनतई और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त अपराधी शामिल हैं. ये जेल भी जा चुके हैं और उनका आपराधिक इतिहास रहा है. इनकी गतिविधियों से भविष्य में भी कानून-व्यवस्था को खतरा हो सकता है.
3400 अपराधियों पर पुलिस की नजर
धनबाद पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में करीब 3400 अपराधियों को जेल भेजा गया है. इनमें धनबाद के अलावा दूसरे जिलों व दूसरे राज्यों के अपराधी भी शामिल हैं. जिले से बाहर और दूसरे राज्यों के अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी अब सर्विलांस प्रोसिडिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
कैसे होती है सर्विलांस प्रोसिडिंग
सर्विलांस प्रोसिडिंग की प्रक्रिया सुनियोजित और प्रशासनिक स्तर पर जांची-परखी होती है. इसमें सबसे पहले स्थानीय थाना संबंधित अपराधी का पूरा विवरण जुटाता है. इसमें उसके आपराधिक इतिहास, वर्तमान गतिविधियां और संदिग्ध संपर्क शामिल होते हैं. इसके बाद यह रिपोर्ट डीएसपी को भेजी जाती है. डीएसपी जांच के बाद रिपोर्ट सिटी एसपी व ग्रामीण एसपी के पास अग्रसारित करते हैं. वहां से अनुमोदन मिलने पर एसएसपी फाइनल रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त को सौंपते हैं. डीसी पूरे मामले का अवलोकन कर संतुष्ट होने के बाद उस पर मुहर लगाते हैं. इसके बाद ही संबंधित अपराधी को आधिकारिक रूप से सर्विलांस प्रोसिडिंग में शामिल किया जाता है.
पुलिस कभी भी कर सकती है कार्रवाई
सर्विलांस प्रोसिडिंग में शामिल अपराधियों के खिलाफ पुलिस को विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं. पुलिस कभी भी उनके घर जाकर तलाशी ले सकती है, उन्हें किसी भी समय थाना बुलाया जा सकता है. उनकी हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाती है. उनका उठना-बैठना, संपर्क और मूवमेंट पुलिस के रिकॉर्ड में रहता है, ताकि किसी भी आपराधिक साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके.
बेलरों का होगा सत्यापन
पुलिस ने बताया कि जिन 830 अपराधियों को सर्विलांस प्रोसिडिंग किया गया है, उनमें सभी अपराधी जेल जा चुके हैं. अब धनबाद पुलिस उनके बेलरों का सत्यापन से कर रही है. पता लगा रही है कि बेलर सही हैं या फर्जी. यदि फर्जी बेलर का प्रमाण मिलता है तो वैसे बेलर के खिलाफ भी कार्रवाई की जायेगी. एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि इस कदम से अपराधियों पर निगरानी रखने में पुलिस का काफी सहुलियत हाेगी. वहीं अपराधियों में भी पुलिस का खौफ बना रहेगा. इससे जिले में शांति व्यवस्था बनाये रखने और आपराधिक घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण लग सकता है.
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