Dhanbad News: करुणा के सम्मान से ही बनेगा बेहतर समाज : कैलाश सत्यार्थी

Dhanbad News: आइआइटी आइएसएम में शताब्दी व्याख्यान शामिल हुए नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, बोले : ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लायें.

धनबाद, आइआइटी आइएसएम धनबाद के पेनमैन ऑडिटोरियम में शनिवार को शताब्दी व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए. कैलाश सत्यार्थी ने अपने संबोधन में ‘करुणा भागफल’ (कम्पैशन कोशेंट – सीक्यू) की अवधारणा को विस्तार से समझाया. श्री सत्यार्थी ने कहा कि समाज के विकास के लिए केवल बुद्धिमत्ता (आइक्यू) और भावनात्मक क्षमता (इक्यू) पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि करुणा को भी समान महत्व देना जरूरी है. कम्पैशन कोशेंट से ही बेहतर समाज का निर्माण होगा. करुणा को बताया निर्णय का आधार नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि करुणा केवल भावना नहीं, बल्कि निर्णय लेने का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है. सीक्यू का अर्थ केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, कार्यवाही और नैतिक विकल्प है. उन्होंने संस्थानों और संगठनों से अपील की कि वे करुणा को नेतृत्व के प्रमुख गुण के रूप में स्वीकार करें. कॉर्पोरेट नेतृत्व में सीक्यू की जरूरत श्री सत्यार्थी ने कॉर्पोरेट जगत को संदेश देते हुए कहा कि वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति के समय करुणा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उनके अनुसार, सहानुभूति आधारित नेतृत्व संस्थानों को अधिक नैतिक, पारदर्शी और टिकाऊ बनाता है. उन्होंने आइआइटी आइएसएम के विद्यार्थियाें से आह्वान किया कि भविष्य में व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों में सीक्यू की भूमिका बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि भविष्य में युवा विवाह के लिए कुंडली के बजाय अपने साथी के करुणा भागफल को महत्व दे सकते हैं, ताकि बेहतर तालमेल और समझ विकसित हो सके. समाज में बढ़ती उदासीनता खतरनाक श्री सत्यार्थी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में करुणा को शामिल करना बेहद जरूरी है. इससे बच्चों में संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना का विकास होगा. उन्होंने बाल श्रम, शोषण और गरीबी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए करुणा को एक ‘क्रियाशील शक्ति’ के रूप में अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने सीक्यू की अवधारणा को विस्तार देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को दूसरों के दुख को अपना समझकर कार्य करना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि आज के समय में बढ़ती उदासीनता समाज के लिए खतरा है और इसे करुणा के जरिए ही दूर किया जा सकता है. कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उनके विचारों को प्रेरणादायक बताया. तकनीक के क्षेत्र में कम्पैशनेट एआइ श्री सत्यार्थी ने तकनीक के क्षेत्र में भी करुणा के महत्व पर जोर देते हुए ‘कम्पैशनेट एआइ’ की आवश्यकता बतायी. उनके अनुसार यदि तकनीक में मानवीय मूल्यों का समावेश नहीं होगा, तो विकास अधूरा रह जाएगा. उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा व संचालन कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन की डीन प्रो रजनी सिंह ने किया.

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By Anand kumar upadhyay

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