धनबाद से विकी प्रसाद की रिपोर्ट
Dhanbad Hospital Strike: धनबाद के सदर अस्पताल परिसर स्थित पंचकर्म भवन के समीप दीवार खड़ी किए जाने का मामला शनिवार को अचानक गंभीर हो गया. इस मुद्दे के विरोध में सदर अस्पताल के सभी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मी और अन्य कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए. हड़ताल का असर सुबह से ही अस्पताल परिसर में साफ दिखा, जहां ओपीडी से लेकर नियमित सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं. इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई मरीज बिना इलाज के ही लौटने को मजबूर हुए.
ओपीडी से लेकर जांच तक सब बंद, मरीज परेशान
हड़ताल के कारण ओपीडी पूरी तरह बंद रही. न तो मरीजों का पंजीकरण हुआ और न ही डॉक्टरों से परामर्श मिल सका. जांच, पैथोलॉजी, एक्स-रे और दवाइयों के वितरण पर भी व्यापक असर पड़ा. अस्पताल परिसर में सुबह से अफरा-तफरी का माहौल रहा. दूर-दराज से आए मरीज और उनके परिजन यह समझ ही नहीं पा रहे थे कि सेवाएं कब तक बहाल होंगी. कई मरीजों ने मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख किया, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ा.
पंचकर्म भवन के पास धरना, जिलेभर से पहुंचे स्वास्थ्यकर्मी
हड़ताल के दौरान चिकित्सकों और कर्मचारियों ने अपने-अपने विभागों में काम बंद कर दिया और पंचकर्म भवन के समीप धरना पर बैठ गए. धरना स्थल पर जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से आए स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हुए, जिससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला. आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और दीवार निर्माण को तत्काल रोकने की मांग की. धरना स्थल पर दिनभर गहमागहमी बनी रही और अस्पताल की गतिविधियां पूरी तरह ठप नजर आईं.
स्वास्थ्यकर्मियों की दलील, सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा मामला
आंदोलन कर रहे चिकित्सकों और कर्मचारियों का कहना है कि पंचकर्म भवन के पास दीवार निर्माण केवल एक सामान्य निर्माण कार्य नहीं है. यह अस्पताल की सुरक्षा, मरीजों की निजता और कार्यस्थल की गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. उनका आरोप है कि बिना समुचित योजना और सहमति के दीवार खड़ी की जा रही है, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है. स्वास्थ्यकर्मियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, हड़ताल जारी रहेगी.
आपात सेवाओं पर असमंजस, परिजन चिंतित
हड़ताल के बीच आपातकालीन सेवाओं को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं रही. इससे मरीजों और उनके परिजनों में असमंजस की स्थिति बनी रही. गंभीर मरीजों को लेकर आए परिजन परेशान दिखे और कई लोग वैकल्पिक इलाज की तलाश में निजी अस्पतालों की ओर रवाना हो गए. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को जल्द हस्तक्षेप कर समाधान निकालना चाहिए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके और स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सुचारु हो सकें.
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प्रशासन पर टिकी निगाहें, समाधान का इंतजार
फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है. अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो हड़ताल का असर और गहरा हो सकता है. सदर अस्पताल जैसे बड़े सरकारी संस्थान में सेवाएं ठप होने से आम जनता सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है. मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा, ताकि अस्पताल की सेवाएं बहाल हो सकें.
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