Dhanbad News: शिक्षा विभाग का हाल, 11 प्रखंडों में सिर्फ एक बीइइओ
Dhanbad News: बच्चों से जुड़ी कई योजनाएं और राज्य परियोजना को भेजी जाने वाली रिपोर्टें कागजों पर ही किसी तरह पूरी की जा रही हैं. अधिकारियों की भारी कमी के कारण योजनाओं को धरातल पर उतारना चुनौती बन गया है.
By MAYANK TIWARI | Updated at :
जिले में शिक्षा विभाग का हाल बेहाल है. 11 प्रखंडों में फिलहाल केवल एक प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सह प्रखंड समन्वयक कार्यरत हैं, इनके जिम्मे पांच प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार है. बाकी प्रखंडों का काम जिला शिक्षा अधीक्षक आयुष कुमार के भरोसे चल रहा है. यह स्थिति जनवरी में एक और फरवरी माह में दो प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद हुई है. ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कत आने लगी है. झारखंड शिक्षा परियोजना के तहत संचालित समग्र शिक्षा योजना का वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं. इसके बावजूद बच्चों से जुड़ी कई योजनाएं और राज्य परियोजना को भेजी जाने वाली रिपोर्टें कागजों पर ही किसी तरह पूरी की जा रही हैं. अधिकारियों की भारी कमी के कारण योजनाओं को धरातल पर उतारना चुनौती बन गया है.
ये काम हो रहे हैं प्रभावित
प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी प्रखंड स्तर पर शिक्षा विभाग का प्रमुख प्रशासनिक पद होता है. प्रखंड के सभी सरकारी स्कूलों और शिक्षा योजनाओं की निगरानी करना होता है. प्रखंड के सभी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों का निरीक्षण करना और यह देखना कि पढ़ाई-लिखाई सही तरीके से हो रही है या नहीं, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं जैसे समग्र शिक्षा, मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति, किताब वितरण, यूनिफॉर्म आदि योजनाओं को सही तरीके से लागू कराना, शिक्षकों की उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और स्कूल के अनुशासन की नियमित समीक्षा करना, प्रखंड के स्कूलों से संबंधित विभिन्न रिपोर्ट तैयार कर जिला शिक्षा अधीक्षक और राज्य परियोजना कार्यालय को भेजना, क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) और ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) के काम की निगरानी करना और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश देना, शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन और संचालन, स्कूल भवन, शौचालय, पेयजल, मरम्मत और अन्य विकास कार्यों की जांच और प्रगति की समीक्षा, स्कूल, शिक्षक, छात्र या अभिभावकों से जुड़ी शिकायतों का निपटारा, बच्चों की पढ़ाई के स्तर को सुधारने के लिए विशेष कार्यक्रम और निरीक्षण करना है. बीइइओ की कमी के चलते ये काम प्रभावित हो रहे हैं.
सीआरपी व बीआरपी के भरोसे चल रही है व्यवस्था
जिले में जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था काफी हद तक सीआरपी और बीआरपी के भरोसे चल रही है. संकुल स्तर पर यही कर्मी विभिन्न योजनाओं का पालन करते हुए रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं और उसे संकलित कर विभाग तक पहुंचा रहे हैं. इसके बावजूद सरकार की ओर से न तो इन्हें स्थायी किया जा रहा है और न ही प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए कोई परीक्षा आयोजित की जा रही है.
राज्य में सीआरपी और बीआरपी की कमी
सीआरपी और बीआरपी वर्षों से संविदा पर काम कर रहे हैं और उन्हें काफी कम मानदेय मिल रहा है. जानकारी के अनुसार राज्य में फिलहाल करीब 80 से 90 प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 264 प्रखंड हैं. राज्य में 24 जिले और पांच प्रमंडल हैं. इस हिसाब से करीब 270 प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी के पदों पर नियुक्ति की आवश्यकता बतायी जा रही है. वर्तमान में नई बहाली भी नहीं निकल रही है, जिससे समस्या और बढ़ रही है. दूसरी ओर सीआरपी और बीआरपी को न तो चिकित्सा सुविधा दी गयी है और न ही लंबे समय से उनका मानदेय बढ़ाया गया है. करीब 20 वर्षों से कार्यरत कई सीआरपी और बीआरपी आज भी 22 हजार से 27 हजार रुपये के मानदेय पर काम कर रहे हैं. शिक्षा कर्मियों का कहना है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लंबे समय से कार्यरत कर्मियों के लिए परीक्षा लेकर उन्हें सरकार के विभिन्न विभागों में समायोजित किया जाना चाहिए. हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है.