Dhanbad News : कोल इंडिया को खनिज संपन्न राज्यों को चुकाने होंगे 38,000 करोड़

अगस्त 2024 में आये सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का पड़ेगा प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी की अनुषंगी इकाई सीसीएल व एमसीएल पर सर्वाधिक असर

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त महीने में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर पूर्वव्यापी कर लगाने का अधिकार दिया था. अदालत के इस फैसले का असर कोल इंडिया पर पड़ेगा. सरकारी स्वामित्व वाली प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया को अगले कुछ वर्षों में खनिज संपन्न राज्यों को लगभग 38,000 करोड़ रुपये चुकाने होंगे. इसका सर्वाधिक असर कोल इंडिया की सहायक कंपनी सीसीएल और एमसीएल पर पड़ेगा. हालांकि, कंपनी को अपने ईंधन आपूर्ति समझौतों के माध्यम से लगभग 80 प्रतिशत राशि वसूल करने की उम्मीद है. बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में राज्यों को पूर्वव्यापी रूप से प्राप्त रॉयल्टी के अलावा खदानों और निकाले गये खनिजों पर कर लगाने का अधिकार दिया था. फैसले में कहा गया कि खनिजों पर रॉयल्टी कोई कर नहीं, बल्कि एक संविदात्मक प्रतिफल है. राज्यों के पास खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत रॉयल्टी संग्रह के अलावा खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने की विधायी शक्ति है.

नौ न्यायाधीशों की पीठ ने आठ-एक के बहुमत से दिया था फैसला :

सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने आठ-एक के बहुमत से दिये फैसले में कहा था कि राज्यों को खदानों और खनिज वाली भूमि व खनिज अधिकारों पर कर लगाने का अधिकार है. कोर्ट ने माना कि रॉयल्टी कर की प्रकृति में नहीं आती, बल्कि यह खनन पट्टे के लिए पट्टेदार द्वारा भुगतान किया गया एक संविदात्मक प्रतिफल है. इस फैसले से खनिज संपन्न राज्य झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान को फायदा होगा.

कोल इंडिया पर क्या पड़ेगा असर :

विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय से भारत में खनिज संसाधन प्रबंधन और राजस्व वितरण पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है. इससे केंद्र और खनिज समृद्ध राज्यों के बीच राजकोषीय संबंध में संभावित रूप से बदलाव आयेगा. इसका असर मुख्य रूप से कोल इंडिया की दो सहायक कंपनियों सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) व महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) पर पड़ेगा.

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