कोल इंडिया का फोकस कोयले से आगे, एक अरब टन उत्पादन लक्ष्य के बीच BCCL के लिए खुलेंगे विस्तार के रास्ते

कोल इंडिया ने 2030 तक एक अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा है। बीसीसीएल की भूमिका और भविष्य की विस्तार योजनाओं पर पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच कोल इंडिया ने अब उत्पादन का अगला बड़ा लक्ष्य तय कर दिया है. कंपनी वित्तीय वर्ष 2029-30 तक सालाना करीब एक अरब टन कोयला उत्पादन के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है. इसके साथ ही कोल इंडिया का फोकस केवल कोयला निकालने तक सीमित नहीं रहेगा.

सौर ऊर्जा, कोयला गैसीकरण, महत्वपूर्ण खनिज और लौह अयस्क जैसे क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी है. ऐसे में कोयला क्षेत्र के लिए अहम सवाल यह है कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य में बीसीसीएल की भूमिका और हिस्सेदारी कितनी बढ़ेगी.

एजीएम में रखा कंपनी के विकास का रोडमैप

सोमवार को आयोजित कोल इंडिया की 52वीं वार्षिक आमसभा में सीएमडी चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक बी. साईंराम ने कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति का रोडमैप सामने रखा. उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में कोयला अभी भी महत्वपूर्ण आधार है.

कोल इंडिया लिमिटेड

हालांकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी का उत्पादन 768.19 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष के 781.06 मिलियन टन से कम है. कुल उठाव 744.83 मिलियन टन रहा. दूसरी तिमाही में अत्यधिक बारिश और निकासी संबंधी परेशानियों का उत्पादन पर असर पड़ा, लेकिन चौथी तिमाही में स्थिति में सुधार हुआ.

बीसीसीएल की सूचीबद्धता से बदला परिदृश्य

कोल इंडिया के रणनीतिक बदलाव में बीसीसीएल की सूचीबद्धता को बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया. बीसीसीएल की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के बाद 19 जनवरी 2026 को शेयर बाजार में सूचीबद्धता हुई. इसके आइपीओ को करीब 147 गुना अभिदान मिला. इससे बीसीसीएल के प्रदर्शन, उत्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं पर निवेशकों की नजर और मजबूत हुई है.

सीएमपीडीआइ का 15 प्रतिशथ विनिवेश

केंद्रीय खान योजना एवं डिजाइन संस्थान लिमिटेड (सीएमपीडीआइ) की भी 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 30 मार्च को सूचीबद्धता की गयी. वहीं महानदी कोलफील्ड्स और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स की सूचीबद्धता को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है.

बीसीसीएल की वाशरी क्षमता 17.35 मिलियन टन

बीसीसीएल में दो मिलियन टन सालाना क्षमता की अतिरिक्त कोयला वाशरी चालू की गयी है. इसके साथ कंपनी की कुल कोयला धुलाई क्षमता बढ़कर 17.35 मिलियन टन सालाना हो गयी है. कटरा के एएसजीकेसीसी खदान से राजस्व हिस्सेदारी आधारित खदान विकासकर्ता एवं संचालक मॉडल के तहत उत्पादन भी शुरू हो चुका है.

कोल इंडिया के खान की तस्वीर

बीसीसीएल के लिए विस्तार महत्वपूर्ण

बीसीसीएल के लिए यह विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोल इंडिया के एक अरब टन उत्पादन लक्ष्य में केवल कच्चे कोयले की मात्रा ही नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता और वैल्यू एडेड कोयले की भूमिका भी अहम होगी.

25 हजार करोड़ की गैसीकरण परियोजना

कोल इंडिया अब कोयले से आगे उसकी वैल्यू चेन पर भी दांव लगा रही है. 20 जून 2026 को भारत की पहली वाणिज्यिक कोयला गैसीकरण परियोजना की नींव रखी गयी. कोल इंडिया और भेल के संयुक्त उपक्रम की इस परियोजना में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा. यहां सालाना 6.6 लाख टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन प्रस्तावित है.

निकासी क्षमता बढ़ाने पर बड़ा निवेश

कोयले को खदान से बाजार तक तेजी से पहुंचाने के लिए कंपनी 72 परियोजनाओं पर करीब 25,600 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. मशीनीकृत निकासी क्षमता को 151 मिलियन टन से बढ़ाकर करीब 994 मिलियन टन सालाना करने की योजना है. भूमिगत खनन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाते हुए 2029-30 तक 70 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.

सौर ऊर्जा में भी बड़ी छलांग

कोल इंडिया ऊर्जा कारोबार में विविधीकरण के लिए अक्षय ऊर्जा पर भी जोर दे रही है. गुजरात के पाटन में 100 मेगावाट का पहला सौर संयंत्र 4 मई 2026 को चालू किया गया. खावड़ा की 300 मेगावाट परियोजना में 200 मेगावाट क्षमता 8 जुलाई को चालू हुई। कंपनी ने 2029-30 तक 9.5 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है.

पांच अहम खनिज ब्लॉक, लौह अयस्क के क्षेत्र में भी कदम

महाराष्ट्र के कवलापुर दुर्लभ मृदा तत्व संयुक्त लाइसेंस ब्लॉक के अधिग्रहण के बाद कोल इंडिया के महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की संख्या पांच हो गयी है. ओडिशा में अनुमानित 288 मिलियन टन संसाधन वाले गदाधरपुर लौह अयस्क ब्लॉक के साथ कंपनी ने लौह अयस्क खनन में भी कदम रखा है. विदेशों में महत्वपूर्ण खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए सिंगापुर में कोल इंडिया ग्लोबल पीटीइ लिमिटेड का गठन किया गया है.

लाभांश और मुनाफे में क्या रहा हाल ?

वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोल इंडिया का समेकित परिचालन राजस्व 1,68,400 करोड़ रुपये रहा. ईबीआईटीडीए 53,276 करोड़, कर पूर्व लाभ 41,923 करोड़ और शुद्ध लाभ 31,071 करोड़ रु रहा. हालांकि पिछले वर्ष कंपनी का शुद्ध लाभ 35,450 करोड़ रुपये था. इसके बावजूद निवल संपत्ति 17 प्रतिशत बढ़कर 1,19,102 करोड़ रु हो गयी.

तीन अंतरिम लाभांश दिये जा चुके हैं शेयरधारकों को

शेयरधारकों को तीन अंतरिम लाभांश के रूप में 21.25 रुपये प्रति शेयर दिये जा चुके हैं. अंतिम 5.25 रुपये प्रति शेयर लाभांश प्रस्तावित है। मंजूरी मिलने पर कुल लाभांश 26.50 रुपये प्रति शेयर होगा. वर्ष 2010 में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी अब तक शेयरधारकों को करीब 1.88 लाख करोड़ रुपये दे चुकी है.

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लेखक के बारे में

By मनोहर कुमार

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