छाताबाद में भू-धंसान और जमीन के जमींदोज होने की घटना के बाद शनिवार को वैज्ञानिक जांच शुरू की गयी. आईआईटी आईएसएम, सीएमपीडीआई, जेआरडीए और रेस्क्यू टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पुराने नक्शों और भूमिगत स्थिति का अध्ययन किया. आईआईटी आईएसएम के वैज्ञानिक गोविंद बिलुरे ने स्थल का वैज्ञानिक सर्वे किया.
सैटेलाइट तस्वीरों से 2022 से अब तक के बदलाव की पड़ताल
विशेषज्ञों की टीम सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से वर्ष 2022 से अब तक जमीन में हुए बदलावों का अध्ययन कर रही है. प्रारंभिक तस्वीरों में वर्ष 2022 से 2025 तक भू-धंसान के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं. वहीं, वर्ष 2026 में धंसान का दायरा बढ़ने की जानकारी सामने आयी है.
टीम जमीन के नीचे बने गोफ, पूर्व में हुए कोयला खनन और काटे गये पीलरों की स्थिति का भी आकलन कर रही है. भूमिगत हिस्से में हुई क्षति का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार विस्तृत अध्ययन के बाद ही भू-धंसान के वास्तविक कारण और क्षेत्र में खतरे का सही आकलन संभव होगा.
ग्रामीणों के विरोध से रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं हो सका शुरू
रेस्क्यू टीम के घटनास्थल पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया. विरोध के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका. लगातार हो रही बारिश से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में भी भय का माहौल है. बाघमारा सीओ गिरजानंद किस्कू ने घटनास्थल का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली.
इधर, प्रभावित परिवार अपने-अपने घरों से जरूरी सामान सुरक्षित निकालने में जुटे रहे. लोगों में भू-धंसान को लेकर दहशत बनी हुई है.
सांसद ढुलू महतो ने प्रभावितों से की मुलाकात
घटना की जानकारी मिलने पर सांसद ढुलू महतो भी घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. इस दौरान उन्हें ग्रामीणों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा. सांसद ने जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन की कार्यशैली पर नाराजगी जतायी.
उन्होंने क्षेत्र में अवैध खनन और कोयला चोरी के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की. साथ ही प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और घटनास्थल पर प्रशासनिक कैंप स्थापित करने की मांग की.
