छाताबाद में फिर धंसी धरती, 200 मीटर दूर बना गोफ; डेढ़ माह में तीसरी घटना

झारखंड के छाताबाद में अवैध कोयला खनन के कारण फिर जमीन धंसी। काजू बागान के पास 25 मीटर का गहरा गोफ बना, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

छाताबाद इलाके में भू-धंसान की घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. आशियाना बचाओ आंदोलन खत्म होने के महज 24 घंटे बाद बुधवार देर शाम काजू बागान हदहदिया के पास जमीन फटने से 20 से 25 मीटर के दायरे में गहरा गोफ बन गया. गोफ में लगातार पास के तालाब का पानी अंदर जा रहा है. घटनास्थल से घनी आबादी करीब 200 मीटर की दूरी पर है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में डर का माहौल है.

कोयला तस्करों ने काट डाले पिलर : स्थानीय

स्थानीय लोगों के अनुसार, राष्ट्रीयकरण से पूर्व और बाद में भूमिगत खदान चली थी. बाद में कोयला तस्करों ने खदान के पिलर तक काट डाले. अवैध खनन होने के कारण जमीन के नीचे का हिस्सा खोखला हो गया है, जिससे लगातार भू-धंसान और गोफ बनने की घटनाएं हो रही हैं.

गोफ | Prabhat Khabar Network

घटना की सूचना मिलते ही कोलियरी मैनेजर अमित कुमार सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे. कोलियरी मैनेजर अमित कुमार ने कहा स्थल की घेराबंदी करायी गयी है. गोफ में जा रहे पानी को दूसरे छोर की ओर डायवर्ट करने के लिए निकासी का रास्ता बनाया जा रहा है. अंधेरा होने के कारण बुधवार रात भराई का काम नहीं हो सका. गुरुवार सुबह से गोफ की भराई शुरू की जायेगी है.

खेल मैदान से करीब 500 मीटर पर है घटनास्थल

स्थानीय लोगों के अनुसार, काजू बागान हदहदिया क्षेत्र में पहले भी भू-धंसान और गोफ बनने की घटनाएं होती रही हैं. 19 अगस्त को बीसीसीएल प्रबंधन ने काजू बागान इलाके को डेंजर जोन बताते हुए नोटिस चिपकाया था. इससे पहले भी प्रबंधन की ओर से आसपास रहने वाले लोगों को जगह खाली करने को कहा गया था, लेकिन लोगों ने जगह खाली नहीं की.

घटनास्थल काजू बागान हदहदिया पूर्व की हादसे वाली जगह छाताबाद खेल मैदान से करीब 500 मीटर की दूरी पर है. दोनों जगहों के मध्य से छाताबाद-भटमुड़ना रोड गुजरता है. काजू बागान हदहदिया भू-धंसान स्थल दक्षिण दिशा में है, जबकि छाताबाद खेल मैदान उत्तर में है.

सघन क्षेत्र होने के खतरा ज्यादा

गोफ स्थल के आसपास करीब आठ से नौ हजार की आबादी रहती है. घटनास्थल के पास ही एक प्रज्ञा केंद्र, तालाब और हदहदिया वाटर सप्लाई प्लांट है. वाटर सप्लाई खदान के पानी से होती है. गोफ से सटे तालाब का पानी लगातार उसमें प्रवेश कर रहा है. क्षेत्र सघन होने के कारण सुबह से रात तक लोगों की आवाजाही बनी रहती है. ग्रामीणों के अनुसार, बस्ती में सुरक्षा के लिहाज से घेराबंदी करना भी आसान नहीं है.

आंदोलन खत्म होने के अगले दिन ही धंस गयी जमीन

छाताबाद में सात अगस्त को हुई भू-धंसान की घटना में एक दर्जन से अधिक घर जमींदोज हो गये थे. इसके बाद वार्ड नंबर दो के पार्षद मो. शहाबुद्दीन के नेतृत्व में आठ अगस्त से जीटीए आउटसोर्सिंग के समीप आशियाना बचाओ अभियान शुरू किया गया था. आंदोलन को कई मंत्री, विधायक, सांसद और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिला.

सुरक्षा के मद्देनजर डीजीएमएस ने आउटसोर्सिंग का काम बंद करा दिया था, जिससे करीब 300 मजदूरों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया था. कई मांगों पर सहमति बनने के बाद 25 अगस्त को आंदोलन समाप्त हुआ. आंदोलन खत्म होने के अगले ही दिन भू-धंसान की नयी घटना सामने आने से लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ मजदूरों के रोजगार को लेकर भी सवाल खड़े हो गये हैं.

इसके अलावा कोलियरी मैनेजर अमित कुमार ने कहा जहां गोफ बना है, वहां से आबादी काफी दूर है. फिलहाल खतरे की कोई बात नहीं है. मामले की जांच की जायेगी.


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By Kamdeo singh

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