बाघमारा से रंजीत सिंह की रिपोर्ट
Dhanbad News: बीसीसीएल के सिजुआ पांच नंबर एरिया द्वारा करीब 28 एकड़ अनाबाद सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण कराने का मामला सामने आया है. यह जमीन बाघमारा अंचल के छोटानगरी पंचायत अंतर्गत नगरीकला मौजा-230 के खाता संख्या-551 (पुराना खाता संख्या-127) में स्थित है. अंचल प्रशासन की हालिया जांच में भी इस आशय की पुष्टि होने की बात कही गयी है. बताया जाता है कि बीसीसीएल ने बिना किसी लीज बंदोबस्ती, अधिग्रहण अथवा सरकारी अनुमति के तेतुलमारी टाउनशिप में करीब 25 एकड़ भू-भाग पर बी, सी और डी टाइप क्वार्टर के अलावा तीन महाप्रबंधकों के लिए बंगले का निर्माण कराया है. इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किये गये हैं.
दो एकड़ जमीन पर बनेगा पार्क और खेल
कंपनी ने यहां दो एकड़ से अधिक जमीन पार्क और खेल मैदान के लिए छोड़ रखी है. इस भू-भाग पर क्वार्टर और बंगले बने हैं, उसके बड़े हिस्से की घेराबंदी भी कर ली गयी है. कुछ हिस्सों में अब भी बाउंड्रीवाल का कार्य बाकी है. सूत्रों के अनुसार वर्ष 2015 से इस भूखंड पर निर्माण कार्य शुरू हुआ था.बाघमारा अंचल के अधिकारियों व कर्मचारियों को जानकारी तक नहीं हुई.
तेतुलमारी में 1.59 एक जमीन पर चहारदीवारी और सड़क
वहीं, तेतुलमारी संयुक्त क्षेत्रीय कार्यालय के समीप करीब 1.59 एकड़ जमीन पर बाउंड्रीवाल और पीसीसी सड़क का निर्माण किया जा रहा है. हालांकि जिस जमीन पर सिजुआ, कतरास, गोविंदपुर तीन और कुसुंडा एरिया ऑफिस बने हैं, वह रैयती जमीन बतायी जा रही है. इन भवनों में अभी सिजुआ और कतरास एरिया ऑफिस ही शिफ्ट हुए हैं. एरिया ऑफिस के सामने का खाली परिसर अनाबाद सरकारी जमीन है, जहां बाउंड्रीवाल और सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है. इस भू-भाग की उत्तर और पूर्व दिशा में घेराबंदी पूरी हो चुकी है, जबकि दक्षिण और पश्चिम दिशा में कार्य बाकी है.
चलता रहा निर्माण कार्य और अनजान बने रहे अधिकारी
मामले का अहम पहलू यह है कि दोनों स्थानों पर वर्षों तक निर्माण कार्य चलता रहा, लेकिन अंचल से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारी और कर्मचारी इससे अनजान बने रहे. ऐसा क्यों, पूछने पर अंचल अधिकारी गिरजा नंद किस्कू ने कहा, “मामला अब मेरे संज्ञान में आया है. उपायुक्त को जानकारी दी गयी है. डीसी के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गयी है, जो जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी. इसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जायेगी.” उन्होंने कहा कि अतिक्रमणवाद चलाने और प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है.
एरिया ऑफिस के सामने भू-भाग पर निर्माण
- खाता संख्या: 551
- प्लॉट संख्या: 3697 और 3698
- कुल रकबा: 1.59 एकड़
आवासीय कॉलोनी क्षेत्र में निर्माण
- खाता संख्या 551 के प्लॉट संख्या: 3432, 3441, 3443, 3457, 3480, 3357, 3367, 3381, 3395, 3396, 3397, 3398, 3399, 3413, 3447, 3444, 3436, 3437, 3438, 3439, 3440, 3442, 3433, 3434, 3496, 3497, 3488, 3489, 3416, 3417, 3419, 3561, 3570, 3581, 3490, 3491, 3495, 3564, 3584, 3586, 3588, 3414, 3357, 3481, 3482, 3484, 3701 और 3482 में कुल 27 एकड़ 56 डिसमिल जमीन शामिल है.
सड़क और दीवार बनने से बंद हुआ ग्रामीण रास्ता
एरिया ऑफिस के सामने खाता संख्या-551 के प्लॉट संख्या-3697 और 3698 की करीब 1.59 एकड़ सरकारी जमीन पर चहारदीवारी और पीसीसी सड़क बनाने का कार्य चल रहा है. ग्रामीणों के अनुसार इस जमीन पर पहले ग्रामीण पथ था, जिसे बाउंड्रीवाल खड़ी कर बंद कर दिया गया. इस रास्ते से दलाही, पांडेडीह समेत दर्जनभर गांवों के लोग सिजुआ-राजगंज मार्ग तक आते-जाते थे. रास्ता बंद होने से अब ग्रामीणों को करीब चार किलोमीटर घूमकर जाना पड़ रहा है. इस संबंध में पूछे जाने पर बाघमारा अंचल अधिकारी गिरजा नंद किस्कू ने कहा कि यदि ग्रामीण सड़क बहाली की मांग करेंगे, तो उस दिशा में पहल की जायेगी. नगरीकला निवासी गुड्डू रवानी बताते हैं, सरकारी नक्शा में रास्ता दर्ज है. हमलोग पहले इस रास्ते का इस्तेमाल करते थे. अब परेशानी हाेती है. वहीं, सीताराम कुम्हार ने कहा, पहले गांव के बच्चे इसी रास्ते से पांडेडीह स्कूल जाते थे. अब बच्चे भी इस रास्ते से वंचित हो गये हैं.
8.35 एकड़ सरकारी जमीन पर खनन का भी आरोप
नगरीकला मौजा के खाता संख्या-551 के प्लॉट संख्या-4694 में 7.45 एकड़ और प्लॉट संख्या-4689 में 2.18 एकड़ सरकारी जमीन पर खनन का आरोप भी बीसीसीएल और आउटसोर्सिंग कंपनी चेन्नई की राधास्वामी इंजीनियरिंग पर लगा था. इस संबंध में 24 दिसंबर 2023 को तत्कालीन अंचल अधिकारी रवि भूषण प्रसाद ने तेतुलमारी थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी में बीसीसीएल सिजुआ क्षेत्र पांच के तत्कालीन पीओ अनिल कुमार सिंह, राधास्वामी इंजीनियरिंग के प्रबंधक मुथु स्वामी और लाइजनर अश्विनी कुमार पांडेय को आरोपी बनाया गया था. आरोप था कि बिना लीज बंदोबस्ती के क्रमश: 6.95 एकड़ और 1.40 एकड़ सरकारी जमीन पर कोयला खनन और ओबी निकालने का कार्य किया गया.
अंचल अधिकारी गिरजा नंद किस्कू से सवाल
- प्रश्न: वर्षों तक निर्माण चलता रहा, जानकारी क्यों नहीं हुई?
- उत्तर: अगर मेरे पहले के अधिकारियों को इसकी थोड़ी भी जानकारी होती, तो अब तक कार्रवाई हो चुकी होती.
- प्रश्न: कहीं जान-बूझकर अनदेखी तो नहीं की गयी?
- उत्तर: इसे प्रशासनिक लापरवाही नहीं कहा जा सकता. सभी मामले हर अधिकारी के कार्यकाल में सामने नहीं आते हैं.
- प्रश्न: अब आगे क्या कार्रवाई होगी?
उत्तर: निर्माण कार्य के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गयी है. लगभग 28 एकड़ सरकारी भूमि पर निर्माण कराया गया है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी.
कैसे मिलती है कोयला कंपनियों को लीज?
झारखंड में कोयला कंपनियों को खनन लीज केंद्र और राज्य सरकार के नियमों के तहत दी जाती है. आमतौर पर लीज की अवधि 30 से 50 वर्षों तक होती है, जिसे आवश्यकता अनुसार बढ़ाया भी जा सकता है. अब अधिकांश कोल ब्लॉक नीलामी के माध्यम से आवंटित किये जाते हैं. कंपनियों को रॉयल्टी, सरफेस रेंट, डीएमएफ और एनएमइटी शुल्क भी देना होता है. नियमों के उल्लंघन या उत्पादन नहीं होने की स्थिति में लीज रद्द की जा सकती है.
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क्या कहते हैं बीसीसीएल के अधिकारी
इस संबंध में जब बीसीसीएल सिजुआ क्षेत्र के महाप्रबंधक निर्झर चक्रवर्ती से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि बीसीसीएल ने सारी जमीन प्लॉट टू प्लॉट खरीदारी की है. कंपनी पर लगाये गये कब्जा करने के सारे आरोप निराधार हैं.
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