बांसजोड़ा कोलियरी की उत्खनन परियोजना के विस्तार को लेकर शुक्रवार को कोलियरी कार्यालय में प्रबंधन और निचितपुर-गड़ेरिया के रैयतों एवं ग्रामीणों के बीच वार्ता हुई. बैठक में परियोजना विस्तार के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के मुद्दे पर चर्चा की गयी, लेकिन किसी ठोस सहमति पर बात नहीं बन सकी.
परियोजना विस्तार के लिए 300 मीटर जमीन की जरूरत
प्रबंधन की ओर से बताया गया कि बांसजोड़ा कोलियरी के विस्तार के लिए करीब 300 मीटर अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता है. निचितपुर और गड़ेरिया क्षेत्र में लगभग ढाई सौ रैयतों और ग्रामीणों के घर इस दायरे में आते हैं, जिससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित होंगे.
उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास की मांग
वार्ता के दौरान ग्रामीणों और रैयतों ने स्पष्ट कहा कि वे परियोजना के लिए स्थान छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए जमीन के बदले उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिना संतोषजनक पुनर्वास व्यवस्था और मुआवजे के वे क्षेत्र खाली नहीं करेंगे.
ग्रामीणों ने सुझाये चार वैकल्पिक स्थल
रैयतों और ग्रामीणों ने पुनर्वास के लिए चार स्थानों का प्रस्ताव भी प्रबंधन के समक्ष रखा और आग्रह किया कि उन्हें इनमें से किसी एक स्थान पर बसाया जाए. हालांकि कोलियरी प्रबंधन ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा चिन्हित भूमि बीसीसीएल की नहीं, बल्कि सरकारी भूमि है. ऐसे में उन स्थानों पर पुनर्वास कराना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है.
जरेडा के तहत पुनर्वास का प्रस्ताव
प्रबंधन की ओर से कहा गया कि फिलहाल जरेडा योजना के तहत करमाटांड़ और बेलगड़िया में पुनर्वास की व्यवस्था उपलब्ध है. हालांकि ग्रामीण और रैयत इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हुए और उन्होंने अपनी मांगों पर पुनर्विचार करने की अपील की.
पीओ अनील कुमार वर्मा ने कहा कि ग्रामीणों और रैयतों द्वारा रखे गये प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा. बैठक में प्रबंधन की ओर से प्रबंधक कमलेश कुमार, सर्वेयर एस.के. मित्रा तथा ग्रामीणों की ओर से शरफुट्टीन मियां, विष्णु महतो, सोहराब अंसारी, संजीत राय, सोनू महतो, दुर्गा तुरी, पप्पू महतो, सुभाष महतो, दीपक महतो, गणेश महतो समेत कई लोग उपस्थित थे.
