सामुदायिक विकास के बिना तकनीकी शिक्षा का औचित्य नहीं : डॉ डीके सिंह

धनबाद. तकनीकी शिक्षा तब तक अधूरी होती है जब तक उसका लाभ सामुदायिक विकास के तहत समाज को नहीं मिलता. यह कहना है बीआइटी सिंदरी के निदेशक डॉ डीके सिंह का. वह राजकीय पॉलिटेक्निक भागा में पिछले दो सप्ताह से राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (एनआइटीटीटीआर) कोलकाता द्वारा यहां सामुदायिक विकास पर संचालित […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 8, 2017 9:07 AM
धनबाद. तकनीकी शिक्षा तब तक अधूरी होती है जब तक उसका लाभ सामुदायिक विकास के तहत समाज को नहीं मिलता. यह कहना है बीआइटी सिंदरी के निदेशक डॉ डीके सिंह का. वह राजकीय पॉलिटेक्निक भागा में पिछले दो सप्ताह से राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (एनआइटीटीटीआर) कोलकाता द्वारा यहां सामुदायिक विकास पर संचालित ट्रेनिंग प्रोग्राम को शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे.

कार्यक्रम में विभिन्न तकनीकी संस्थानों बीआइटी सिंदरी, राजकीय पॉलिटेक्निक भागा, धनबाद, निरसा एवं केके पॉलिटेक्निक के व्याख्याताओं ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य तकनीकी संस्थानों द्वारा सामुदायिक विकास कार्यक्रम का संचालन है. मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों को सामुदायिक कार्यों में तकनीकी संस्थानों की भूमिका से अवगत कराया.

मौके पर बीआइटी के व्याख्याता डॉ. जी कुमार ने सॉफ्ट स्किल का महत्सव समझाया. समापन समारोह में मुख्य अतिथि सिंफर के वरीय वैज्ञानिक डॉ ललन कुमार ने सामुदायिक विकास में सिंफर एवं सीएसआइआर के लैब द्वारा विकसित तकनीकी जानकारियां दी. पिछले दस दिनों से राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान कोलकाता की शीला यादव के संयोजकत्व में कार्यक्रम का संचालन हो रहा था. राजकीय पॉलिटेक्निक भागा के प्राचार्य डॉ एसपी यादव ने अपने संस्थान के कर्मियों राम निवास शर्मा, राज किशोर सिंह, राजेश कुमार रजक एवं अन्य के योगदान की सराहना की.