मधुपुर. महाषष्टी पर रविवार को बेल भरनी जिसे बेल न्योता के नाम से भी जाना जाता है. दुर्गा पूजा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जो महाषष्ठी की पूजा के साथ संपन्न होता है. मां दुर्गा को बिल्व (बेल) के पेड़ विधि विधान के साथ पूजा के साथ मां को आमंत्रित किया गया. देवी इस पेड़ में निवास करती है. यह रस्म आमतौर पर षष्ठी तिथि पर शाम के समय की जाती है. यदि षष्ठी तिथि शाम से पहले समाप्त हो जाती है, तो पंचमी तिथि पर शाम के समय यह अनुष्ठान किया जाता है. बेल भरनी के बाद बेल के फल को मंदिर में स्थापित किया जाता है. जहां विजयादशमी तक उसकी पूजा की जाती है. पूजा को लेकर पूरा शहर भक्तिमय बना हुआ है. चोरो ओर मां के गीतों से गूंज रहा है.
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