Deoghar news : अवैध आरा मिल संचालक को सुनायी दो साल की सश्रम सजा

न्यायिक दंडाधिकारी बंकिम चंद्र चटर्जी की अदालत में चल रहे कंप्लेंट केस में सुनवाई के बाद नामजद आरोपित को भारतीय वन अधिनियम की धाराओं में दोषी पाया और दो साल की सजा सुनायी.

विधि संवाददाता, देवघर. न्यायिक दंडाधिकारी बंकिम चंद्र चटर्जी की अदालत में चल रहे कंप्लेंट केस की सुनवाई पूरी हो गयी. इसके बाद नामजद आरोपित रोहित कुमार वर्मा को भारतीय वन अधिनियम की धाराओं में दोषी पाकर दो साल की सश्रम सजा सुनायी गयी, साथ ही इस पर 1500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. जुर्माना की राशि अदा नहीं करने पर अलग से एक माह की जेल की सजा काटनी होगी. सजायाफ्ता सारवां थाना के रतुरा गांव का रहने वाला है और इसके विरुद्ध वन विभाग के अधिकारी अमीष आशीष के प्रतिवेदन पर 10 अगस्त 2021 को मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें रतुरा गांव में अवैध तरीके से आरा मिल संचालन करने और सुरक्षित वन क्षेत्र से पेड़ काट कर ले जाने का आरोप लगाया गया था. वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर लकड़ी व आरा भी बरामद की थी. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से सहायक लोक अभियोजक राजेश कुमार ने सात लोगों की गवाही दिलायी और दोष सिद्ध करने में सफल रहा. अदालत ने बिहार शॉ मिल अधिनियम की धारा 14 (1) में दोषी पाकर छह माह तथा भारतीय वन अधिनियम की धारा 42 में दोषी पाकर दो साल की सश्रम सजा सुनायी. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेगी. बचाव पक्ष से अधिवक्ता कैलाश यादव ने पक्ष रखा, लेकिन दोष मुक्त कराने में विफल रहा. इस मामले में चार साल बाद फैसला आया. ॰डेढ़ हजार रुपये जुर्माना भी लगाया जिसे मिली सजा रोहित कुमार वर्मा, रतुरा, सारवां, देवघर.

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Published by: Falguni marik

विगत 32 वर्षों से प्रभात खबर में पत्रकारिता करते आ रहा हूं. विशेष तौर पर कोर्ट से संबंधित खबरों के अलावा श्रावणी विशेषांक -बिल्व पत्र में धार्मिक आलेख लेखन, दुर्गापूजा के अवसर पर निकाली गयी दुर्वाक्षत में धार्मिक लेख लिखने, सामयिक कॉलम कोर्ट कचहरी का चक्कर, क्राइम स्टोरी आदि लेखन का अनुभव है. साथ ही लोक भाषा खोरठा में कविता, कहानी लेखन का अनुभव है. झारखंड अधिविध परिषद रांची के वर्ग अष्टम के पाठ्यक्रम में तथा आचार्य विनोवा भावे विश्वविद्यालय में बीए की कक्षा के पाठ्यक्रम में कविता शामिल हो चुकी है. विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएं, कहानियां व आलेखों का भी प्रकाशन हो चुका है.

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