संथाल में बच्चों को स्कूल पहुंचाने की मुहिम सुस्त: गोड्डा 0.01%, देवघर 2.95%, पाकुड़ 3.44%; छह जिलों से जवाब

स्कूल से बाहर बच्चों को जोड़ने का अभियान धीमी गति से चल रहा है. 17.94% सर्वे, 6 जिलों से शिक्षा विभाग ने मांगा जवाब.

वरीय संवाददाता, देवघर. स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चल रहे विशेष नामांकन अभियान सेतेंग (एसईटीईएनजी) की रफ्तार कई जिलों में बेहद धीमी है. अभियान के दूसरे चरण में 27 अगस्त तक घर-घर सर्वे की प्रगति महज 17.94 प्रतिशत रही है. धीमी प्रगति को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने छह जिलों से स्पष्टीकरण मांगा है.

4.48 लाख परिवारों का होना है सर्वे, 80 हजार ही हुए कवर

आंकड़ों के अनुसार, अभियान के तहत कुल 4,48,543 परिवारों का घर-घर सर्वे किया जाना है. इसके मुकाबले अब तक 80,475 परिवारों का सर्वे पूरा हुआ है, जबकि 3,68,068 परिवार अभी भी सर्वे से बाहर हैं. इससे अभियान की जमीनी प्रगति का अंदाजा लगाया जा सकता है.

कुछ जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है. गोड्डा में अब तक महज 0.01 प्रतिशत, देवघर में 2.95 प्रतिशत, पाकुड़ में 3.44 प्रतिशत और गढ़वा में 9.98 प्रतिशत परिवारों का ही सर्वे पूरा हो सका है. इन जिलों में बड़ी संख्या में परिवारों तक अभियान की टीम अब तक नहीं पहुंच पायी है.

पिछले सर्वे में 1,064 बच्चे अब भी नामांकन से बाहर

अभियान के तहत स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें विद्यालय से जोड़ने का लक्ष्य है. लेकिन पिछले घर-घर सर्वे के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं. पिछले सर्वे में 2,076 बच्चों की पहचान की गयी थी. इनमें से 1,012 बच्चों का नामांकन कराया जा सका, जबकि 1,064 बच्चे अब भी नामांकन से बाहर हैं.

वहीं, दूसरे चरण के नये सर्वे में अब तक 70 बच्चों की पहचान हुई है. इनमें से 54 बच्चों का नामांकन कराया जा चुका है, जबकि 16 बच्चे अभी नामांकन की प्रक्रिया से बाहर हैं.

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लंबित परिवारों और बच्चों को जल्द कवर करने का निर्देश

शिक्षा विभाग ने अभियान की धीमी गति पर चिंता जताते हुए संबंधित अधिकारियों को सर्वे कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है. अधिकारियों से कहा गया है कि लंबित परिवारों और स्कूल से बाहर बच्चों को जल्द से जल्द अभियान के दायरे में लाया जाए.

विभाग ने विशेष रूप से धीमी प्रगति वाले जिलों से स्पष्टीकरण मांगा है. अब संबंधित जिलों के अधिकारियों को यह बताना होगा कि निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले सर्वे की प्रगति इतनी कम क्यों है और लंबित परिवारों व बच्चों को कवर करने के लिए आगे क्या कार्ययोजना अपनायी जा रही है.

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लेखक के बारे में

By अजय कुमार यादव

राजेंद्र प्रसाद यूनिवर्सिटी, मुंबई से पीजी डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन की अर्हता हासिल है. प्रभात खबर से जुड़ कर बीते 21 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम किया है. फिलहाल प्रभात खबर देवघर यूनिट में वरीय संवाददाता के पद पर कार्यरत हूं. अपराध, शिक्षा, बिजली व खेल के क्षेत्र की लंबे समय से रिपोर्टिंग की है. मगर खेल के क्षेत्र में रिपोर्टिंग का अपना विशेष अनुभव है. इस दौरान कई राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय खिलाड़ियों से रूबरू होकर उनका साक्षात्कार करने का अनुभव रहा है.
इ-मेल पता= ajaykyadav58@gmail.com

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