विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर अर्पित किये श्रद्धासुमन
गुरु नानक, सज्जाद जहीर की जयंती व बाबा नागार्जुन की पुण्यतिथि पर किये गये याद
मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में महान समाज सुधारक गुरु नानक, प्रगतिशील आंदोलन के अग्रदूत सज्जाद जहीर की जयंती व बाबा नागार्जुन की पुण्यतिथि पर याद किया गया. तीनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया. इस अवसर पर धनंजय प्रसाद ने कहा कि महान समाज सुधारक गुरु नानक की जयंती प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है. गुरु नानक मानवता के सबसे बड़े पैरोकार थे. उनका मानना था कि धर्म का असली अर्थ मानवता है. उन्होंने कहा कि जो मेहनत से कमाई करता है और उस कमाई से दूसरों को सहयोग करता है वही सही धर्म है. सज्जाद जहीर प्रगतिशील आंदोलन के अग्रदूत व प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक थे. उन्होंने प्रगतिशील सांस्कृतिक व साहित्यिक आंदोलन की शुरुआत की. उन्होंने ही आजादी की लड़ाई में लेखक, पत्रकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मियों को जोड़ने का काम किया. उन्होंने विश्व स्तर पर लेखकों व संस्कृति कर्मियों को संगठित किया. उनके ही नेतृत्व में प्रगतिशील लेखक संघ का प्रथम सम्मेलन लखनऊ में 1936 में सम्पन्न हुआ. जिसकी अध्यक्षता कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद ने की थी. वो आजादी की लड़ाई में कई बार जेल भी गये. उनकी महत्वपूर्ण कृतियों में अंगारे, रौशनाई, बीमार, लंदन की एक रात, जिक्र-ए-हाफिज, पिछला नीलाम आदि कृतियां प्रकाशित हुई. अंगारे पर अंग्रेजी हुकूमत ने प्रतिबंध लगाकर पुस्तक को जब्त कर लिया. बाबा नागार्जुन जनकवि थे. वे कबीर की तरह सामाजिक व व्यवस्थागत विसंगतियों पर करार चोट करते रहे. मौके पर अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये.
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