मधुपुर. शहर के भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी यतींद्र नाथ दास व दसवें राष्ट्रपति के आर नारायणन की जयंती व हंस के संपादक राजेंद्र यादव को स्मृति दिवस पर याद किया गया. उपस्थित लोगों ने विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. वहीं, धनंजय प्रसाद ने कहा कि यतींद्र नाथ दास देश के उन देशभक्त क्रांतिकारियों में से एक है. जिन्होंने देश की आजादी के अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये है. असहयोग आंदोलन के दरम्यान जेल गये. वे सुभाषचंद्र बोस के भी सहायक रहे. कांग्रेस सेवादल में भी रहे. गांधी जी ने जब आंदोलन वापस ले लिया तो वो काफी क्षुब्ध होकर क्रांतिकारियों के संगठन में शामिल होगा. भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, प्रफुल्ल चाकी, बिस्मिल, अशफाकुल्लाह खां आदि के साथ काम किया. वे दक्षिणेश्वर बम कांड, काकोरी कांड व असेंबली बम कांड में 14 जून 1929 को गिरफ्तार कर लाहौर जेल में रखे गए. जहां कैदियों के लिए राज बंदियों जैसे व्यवहार की मांग को लेकर 13 जुलाई 1929 को भूख हड़ताल शुरू की. 13 सितंबर 1929 तक लगातार भूख हड़ताल कर वीरगति को प्राप्त किया. इस घटना को लेकर ब्रिटिश हुकूमत सहित पूरे देश में हड़कंप मच गयी. उनके शव लाहौर से कोलकाता लाया गया. सुभाषचंद्र बोस ने उन्हें रिसीव किया. उन्होंने कहा कि राजेंद्र यादव हंस के संपादक थे. उन्होंने हंस के माध्यम से स्त्री विमर्श, दलित विमर्श को न सिर्फ मंच दिया बल्कि आजीवन सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्षरत रहे. ऐसे विभूतियों को भला कैसे बिसराया जा सकता है. अन्य लोगों ने विचार व्यक्त किया. हाइलार्ट्स : यतीन्द्र नाथ दास, केआर नारायणन की जयंती व संपादक राजेन्द्र यादव को स्मृति दिवस पर किया गया याद
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