सारठ. प्रखंड के श्रीरामचरितमानस पुरुषोत्तमधाम में प्रांगण में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग का 33वां वार्षिक अधिवेशन का बुधवार को समापन हो गया. कार्यक्रम के दूसरे व अंतिम दिन सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस के शिष्य महर्षि योगानंद एवं उनके सहयोगियों द्वारा सत्संग की महिमा का बखान किया गया. इस दौरान उन्होंने समाज के कई विकृतियों के बारे में बताया. विधि के विधान को कोई नहीं टाल सकता अगर आपके साथ कुछ अनहोनी होती है तो आपके कर्मों के कारण हुई है. इसके लिए ईश्वर को दोषी ठहराना कतई उचित नहीं, इसलिए मनुष्य को हर परिस्थिति में ईश्वर की भक्ति, संतों का सम्मान सत्संग में भाग लेते रहना चाहिए. उन्होंने महाभारत काल में पांडवों व रामायण में भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि जो मनुष्य विकट परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य पथ पर चलते रहता है. उन्हें ही मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसीलिए हमें सदैव सतकर्म करना चाहिए. उन्होंने शराब के सेवन, जुआ समेत अन्य कुकर्मों से दूर रहने पर ही मानव जीवन का कल्याण व प्रगति हो सकती है, जिस घर में शराबी जुआरी रहते हैं. उसके परिवार की बर्बादी निश्चित है. वहां न तो लक्ष्मी ठहरती है और न ही शांति रहती है. वहीं, उन्होंने माता-पिता व गो सेवा को सभी तीर्थों से ऊपर बताया. कहा कि घर में माता-पिता तकलीफ में रहे तो कोई तीर्थ करने से मनुष्य को पुण्य प्राप्त नहीं हो सकती. वहीं, सत्संग के अंतिम दिन पूर्व मंत्री रणधीर सिंह भी पहुंचे. सत्संग आयोजन के लिए उन्होंने गुरुजनों व आयोजन समिति को धन्यवाद दिया. मौके पर समिति के किशोरी पोद्दार, विनय पोद्दार, परेश यादव, पवन कुमार सिन्हा, महंत रामदास, राजेश राजहंस, रामदेव साह, छोटेलाल साह, जगदानंद पत्रलेख रामानुज साह, परमेश्वर मंडल, किशोरी पोद्दार आदि मौजूद थे. —————– दो दिवसीय संतमत-सत्संग दूसरे दिन भक्तिभाव से हुआ संपन्न पूर्व कृषिमंत्री रणधीर कुमार सिंह भी सत्संग में हुए शामिल
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