फूडिंग बिहेवियर के कारण त्रिकुट में बदला बंदरों का व्यवहार, पर्यटकों पर बढ़े हमले

त्रिकुट पहाड़ पर बंदरों के व्यवहार में बदलाव से पर्यटक परेशान. कुरकुरे, चिप्स की लत से चार-पांच दर्जन पर्यटक घायल. सुरक्षा पर सवाल. जानें पूरी खबर.

कुरकुरे, चिप्स व बिस्किट की आदत से बदला बिहेवियर, एक दिन पहले दर्जनों पर्यटक हुए घायल

अजय यादव, देवघर : त्रिकुट पहाड़ पर बंदरों के बदले व्यवहार ने पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. बीते एक माह से बंदरों के हमले की छिटपुट घटनाएं सामने आ रही थीं, लेकिन मंगलवार को स्थिति अचानक गंभीर हो गयी. त्रिकुट पहाड़ घूमने पहुंचे चार-पांच दर्जन पर्यटकों पर बंदरों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया. घटना के बाद पहाड़ पर अफरा-तफरी मच गयी. घायलों का तत्काल त्रिकुट स्थित शिविर में प्राथमिक उपचार कराया गया. गंभीर रूप से घायलों का सदर अस्पताल में बेहतर इलाज संभव हो सका.

घायलों में राजस्थान, ओडिशा, बेंगलुरु, चाईबासा, रांची, रामगढ़ और बिहार के पटना व जयपुर समेत विभिन्न स्थानों से आये पर्यटक शामिल थे. बंदरों ने पर्यटकों के हाथ, पैर समेत शरीर के अन्य हिस्सों में काटकर व नोचकर जख्मी किया. घटना के बाद त्रिकुट में पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

त्रिकुट पहाड़ पर बंदरों के बदले व्यवहार,

3000-4000 बंदर, खाने की आदत बदली

विभागीय जानकारी के अनुसार त्रिकुट पहाड़ पर करीब 3000 से 4000 बंदर हैं. वन विभाग की ओर से उन्हें नियमित रूप से हरा चना खिलाया जाता है. डीएफओ अभिषेक भूषण के अनुसार पिछले एक-दो वर्षों में बंदरों के फूडिंग बिहेवियर में काफी बदलाव आया है. पर्यटक उन्हें कुरकुरे, बिस्किट और चिप्स खिलाने लगे हैं. इससे बंदरों को इन खाद्य पदार्थों का स्वाद लग गया है और अब वे पर्यटकों के बैग या हाथ में खाने की चीज देखते ही उनके पास पहुंच जाते हैं.

पर्यटकों की नजदीकी पड़ रही भारी, वर्दी देखते ही शांत हो जाते हैं बंदर

पर्यटकों द्वारा बंदरों के साथ नजदीकियां बढ़ाने, फोटो व सेल्फी लेने तथा उन्हें खिलाते समय सिर पर हाथ फेरने की कोशिश भी की जाती है. इससे बंदर भयभीत या उग्र होकर हमला कर देते हैं. विभाग के अनुसार सामान्य तौर पर बंदर भोजन चाहते हैं, लेकिन इंसानी हस्तक्षेप पसंद नहीं करते. वर्दी देखते ही शांत रहते हैं बंदर बंदरों के हमले की घटनाओं की पड़ताल में वन विभाग की टीम ने पाया कि वे वन कर्मियों पर हमला नहीं करते. खासकर वर्दी को बंदर पहचानते हैं. अब तक किसी वनरक्षी या वन कर्मी के बंदर के हमले में घायल होने की सूचना नहीं है. इसके विपरीत पर्यटकों और आम लोगों पर हमले की घटनाएं सामने आती रही हैं.

10 लोगों ने मुआवजे के लिए दिया आवेदन

विभागीय जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक बंदर समेत अन्य वन्य जीवों के हमले में घायल 10 लोगों ने मुआवजे के लिए आवेदन दिया है. मुख्यालय से हाल में देवघर वन प्रमंडल कार्यालय को मुआवजा भुगतान के लिए आवंटन प्राप्त हुआ है. मुआवजे के लिए सरकारी अस्पताल के इलाज की पर्ची, विभागीय फार्मेट में जनप्रतिनिधि से अभिप्रमाणित आवेदन, आधार कार्ड, नाबालिग के मामले में अभिभावक का आधार, घायल अवस्था का फोटो और बैंक खाते का विवरण देना आवश्यक है.

माइकिंग कर पर्यटकों को किया जा रहा जागरूक

डीएफओ अभिषेक भूषण ने बताया कि मेला व भीड़ के दौरान पर्यटक बंदरों के काफी करीब पहुंच जाते हैं. इससे हमले की आशंका बढ़ जाती है. विभाग की ओर से माइकिंग के माध्यम से पर्यटकों को बंदरों से दूरी बनाये रखने और उन्हें खाद्य सामग्री नहीं खिलाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है. उन्होंने पर्यटकों से बंदरों के साथ सेल्फी लेने या उन्हें छूने से बचने की अपील की है.


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By Ajay yadav

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