अबुआ राज में गरीबों-जरूरतमंदों का सपना अब भी अधूरा : भुवनेश्वर
आदिवासी एभेन आखड़ा के सदस्यों ने की गोष्ठी
मधुपुर. शहर के बावन बीघा स्थित कोल टोला सपाहा में शनिवार को आदिवासी एभेन आखड़ा के सदस्यों ने बिरसा जयंती सह झारखंड स्थापना दिवस पर एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया. उपस्थित लोगों ने बिरसा भगवान की तस्वीर पर माल्यार्पण कर नमन किया. वहीं, गंगाराम दास ने स्थापना दिवस व बिरसा जयंती के संबंध में पूर्व व वर्तमान की स्थिति को लोगों के बीच रखा. कहा कि जैसे सांप अपना बिल कभी नहीं बनाता. वह चूहे के बिल को दखल कर उनके बाल बच्चे को खा जाता है, उसी तरह आज हमें दोस्त और दुश्मन को भी पहचानने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अपने बच्चे को भरपूर शिक्षा देना है, नशा से दूर रखना है, महापुरुषों की जीवनी को भी पढ़ना है. भुवनेश्वर ने कहा कि आज विकास के नाम पर जातिवाद, धर्म एवं भ्रष्टाचार को राजनीति में प्रवेश कर गया है, जिसके कारण देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो रहा है. बेरनादेत तिर्की ने कहा कि बिरसा का सपना था अबुआ दिशोम, अबुआ राज यह सपना अधूरा ही रह गया है. इसके लिए युवाओं को आगे आने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि मंईयां सम्मान योजना जिस उद्देश्य से लागू किया गया वैसे महिला आज भी अपने अधिकार से वंचित हैं. मौके पर मांझी हड़ाम के बाबूलाल मुर्मू , एभेन आखड़ा के अध्यक्ष भुवनेश्वर कोल, कोषाध्यक्ष ओदिन हांसदा, पुकलू कोल, अघनू कोल, मोती कोल, बहामुनी हेम्ब्रम, गबरियल, युगल किशोर, जयवन्त, कौशल्या, बबिता, कान्ति आदि मौजूद थे. हाइलार्ट्स : आदिवासी एभेन आखड़ा के सदस्यों ने की गोष्ठी
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