मियाद खत्म, फिर पहुंचा अगस्त का अनाज:देवघर की 100+ PDS दुकानें प्रभावित

देवघर में खाद्यान्न वितरण में गंभीर देरी. 100+ पीडीएस दुकानों तक समय पर अनाज नहीं पहुंचा, हजारों कार्डधारी परेशान. जानें क्या है पूरा मामला.

देवघर. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की आपूर्ति व्यवस्था पर अगस्त माह में गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. एफसीआइ से जेएसएफसी के गोदाम तक अगस्त माह का खाद्यान्न समय पर पहुंचने के बावजूद देवघर जिले के विभिन्न प्रखंडों की 100 से अधिक पीडीएस दुकानों तक डोर-स्टेप डिलीवरी (डीएसडी) निर्धारित समय पर नहीं हो सकी. इसका सीधा असर हजारों कार्डधारियों पर पड़ा, जिन्हें समय रहते अगस्त माह का खाद्यान्न नहीं मिल सका.

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अगस्त माह के खाद्यान्न का उठाव और वितरण की निर्धारित समय-सीमा सोमवार को समाप्त हो गयी, जबकि कई पीडीएस दुकानों तक अनाज रविवार और सोमवार को ही पहुंचा. ऐसे में दुकानदारों के सामने अनाज मिलने के बाद भी उसे कार्डधारियों तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा.

देवघर प्रखंड की 30 से अधिक दुकानों से लगातार आती रही शिकायत

देवघर प्रखंड की 30 से अधिक पीडीएस दुकानों के संचालक लगातार विभाग से अगस्त माह का खाद्यान्न डीएसडी के माध्यम से उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे. दुकानदारों को विभागीय स्तर पर जल्द अनाज पहुंचाने का भरोसा भी दिया जाता रहा, लेकिन निर्धारित समय तक आपूर्ति नहीं हो सकी.

दूसरी ओर, कार्डधारी अगस्त माह का अनाज मिलने की उम्मीद में लगातार पीडीएस दुकानों का चक्कर लगाते रहे. कई दुकानदारों के पास पहुंचने पर उन्हें अनाज नहीं मिलने की जानकारी दी गयी. इससे कार्डधारियों में नाराजगी भी देखी गयी.

जब समय-सीमा खत्म होने लगी, तब दुकानों तक पहुंचा अनाज

डीएसडी में देरी का आलम यह रहा कि कई पीडीएस दुकानों में रविवार और सोमवार को अगस्त माह का खाद्यान्न पहुंचाया गया. यानी जिस समय वितरण की निर्धारित अवधि समाप्त होने वाली थी, उसी दौरान दुकानदारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया.

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि दुकानदारों तक अनाज ही समय पर नहीं पहुंचा, तो कार्डधारी निर्धारित अवधि में अपना खाद्यान्न कैसे प्राप्त करते?

सोमवार को जिला आपूर्ति पदाधिकारी के कार्यालय से अगस्त माह के डीएसडी की स्थिति की जानकारी लेने पर भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि जिले की कितनी पीडीएस दुकानों तक खाद्यान्न पहुंच चुका है.

आवंटन से भी कम मिला खाद्यान्न, दुकानदार परेशान

डीएसडी में देरी के साथ-साथ कई पीडीएस दुकानदारों ने आवंटन से कम मात्रा में खाद्यान्न मिलने की शिकायत भी की है.

पीडीएस दुकानदार गोपाल राजहंस ने बताया कि उनकी दुकान से जुड़े कार्डधारियों के लिए सामान्य तौर पर करीब 197 क्विंटल खाद्यान्न का आवंटन मिलता है. इस बार उन्हें महज 118 क्विंटल अनाज ही उपलब्ध कराया गया.

इसी तरह संग्रामलोढ़िया पंचायत के पीडीएस दुकानदार बलराम शर्मा की दुकान की स्थिति भी अलग नहीं है. दुकानदारों का कहना है कि समय पर और पूरी मात्रा में खाद्यान्न नहीं मिलने का सीधा असर कार्डधारियों पर पड़ रहा है.

दुकानदारों को अनाज मिला, लेकिन वितरण के लिए समय नहीं

पीडीएस दुकानदारों की परेशानी सिर्फ खाद्यान्न की कमी तक सीमित नहीं है. कई दुकानदारों का कहना है कि जब उन्हें निर्धारित अवधि के अंतिम दिनों में अनाज उपलब्ध कराया गया, तो कार्डधारियों के बीच उसका वितरण पूरा करना मुश्किल हो गया.

दुकानदारों के अनुसार, यदि डीएसडी समय पर पूरी हो जाती, तो निर्धारित अवधि के भीतर ही कार्डधारियों को खाद्यान्न वितरित किया जा सकता था. देर से आपूर्ति होने के कारण अब विभागीय अनुमति पर निर्भरता बढ़ गयी है.

99 फीसदी दुकानों तक डीएसडी पूरा होने का दावा

जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रीतिलता किस्कू ने कहा कि जिले में अगस्त माह के खाद्यान्न का डीएसडी करीब 99 फीसदी दुकानों तक पूरा हो चुका है. कार्डधारियों के बीच खाद्यान्न वितरण के लिए निर्धारित तिथि बढ़ाने का अनुरोध विभाग से किया गया है.

उन्होंने कहा कि विभागीय अनुमति मिलने के बाद ही आगे खाद्यान्न वितरण की कार्रवाई की जायेगी.

हालांकि, निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कई दुकानों तक अनाज पहुंचने और कुछ दुकानदारों को आवंटन से कम खाद्यान्न मिलने की शिकायतों ने जिले की पीडीएस आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिये हैं.

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लेखक के बारे में

By विजय कुमार

विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है. पिछले 22 वर्षों से लगातार प्रभात खबर से जुड़ा हूं. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर सिर्फ ग्राउंड रिपोर्टिंग ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनहित की आवाज बनने का काम किया. बिजली, नगर निगम व कृषि से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने लाकर नीति निर्माण में योगदान दिया. पत्रकारिता की पढ़ाई महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से की.

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